जगदलपुर। छत्तीसगढ़ दौरे के तीसरे और अंतिम दिन बस्तर पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर, भारत की संस्कृति का आभूषण है। बस्तर पंडुम के माध्यम से यहां की संस्कृति और गौरवशाली परंपरा को छत्तीसगढ़ सरकार ने नए प्राण देने का काम किया। अमित शाह और सीएम साय ने बस्तर पंडुम 2026 के सभी विजेताओं को सम्मानित किया।

अमित शाह ने इस दौरान नक्सलियों को साफ संदेश दिया। अमित शाह ने कहा कि बस्तर की पहचान बारूद से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति से है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का तेजी से सफाया हो रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति की तारीफ करते हुए अमित शाह ने कहा कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों को कोई आंच नहीं आएगी। वहीं, अमित शाह ने चेतावनी देते हुए कहा कि स्कूल और अस्पताल जलाने वालों को माफ़ नहीं किया जायेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बस्तर को प्रदेश का सबसे विकसित संभाग बनाया जाएगा। बस्तर पंडुम के समापान समारोह में पहुंचे अमित शाह का मंच में बस्तर की रीति-रिवाज से स्वागत किया गया है। उन्हें कौड़ी की माला और पारंपरिक पगड़ी पहनाई गई। केंद्रीय गृहमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले लोक कलाकारों को राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां उन्हें अपनी कला का प्रदर्शन करने और भोज करने का अवसर भी मिलेगा।

हमारा उद्देश्य जनता को सुरक्षा देना
अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारी लड़ाई किसी से नहीं बल्कि यहां की भोली-भाली आदिवासी जनता को सुरक्षा देना है। माओवाद उन्मूलन की समय सीमा अभी भी वही है। जवानों के अदम्य साहस और बहादुरी से 31 मार्च 2026 तक हो माओवाद को घुटने टेकने पड़ेंगे। उन्होंने प्रदेश में संचालित की जा रही नक्सल पुनर्वास नीति की सराहना करते हुए कहा कि पुनर्वास केंद्रों में उन्हें रोजगारमूलक और सृजनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है।

40 गांवों के स्कूलों में घंटियां सुनाई देती है
गृहमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के तहत प्रदेश सरकार लगातार माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में रोडमैप तैयार कर सड़क, पुल पुलिया, मोबाईल टॉवर स्थापित करने के साथ-साथ राशन वितरण, शुद्ध पेयजल, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड बना रही है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग के माओवाद प्रभावित गांवों में लाल आतंक के चलते विकास से कोसों दूर थे, वहां के 40 गांवों में स्कूल फिर से खोले गए। अब वहां गोलियों की आवाज की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती हैं। दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले में 02 लाख 75 हजार एकड़ जिले में सिंचाई के लिए 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन का कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा।

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