बीजापुर। सुरक्षा बलों को सुकमा जिले में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से पहले बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से ंमाओवादी गतिविधियों में शामिल रहे 21 सशस्त्र नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए सरेंडर कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। सरेंडर करने वाले माओवादियों पर कुल 76 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें कई नक्सली बड़ी वारदातों में शामिल रहे हैं। वहीं बीजापुर जिले में 30 माओवादी कैडरों ने ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवनÓ पहल के तहत आत्मसमर्पण किया है।

माओवादियों ने यह सरेंडर बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज, सीआरपीएफ डीआईजी आनंद राजपुरोहित और सुकमा एसपी किरण चव्हाण के सामने किया है। सरेंडर के दौरान माओवादियों ने एके-47, एसएलआर, इंसास जैसे ऑटोमैटिक हथियारों के साथ-साथ भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी सुरक्षा बलों को सौंपी है।

सुरक्षाबलों के दबाव से बैकफुट में नक्सली
आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि लगातार बढ़ते सुरक्षाबलों के दबाव, सफल एंटी-नक्सल ऑपरेशनों और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर माओवादियों ने यह कदम उठाया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली मुख्य रूप से दरभा डिवीजन और ओडिशा राज्य की सीमा क्षेत्र में सक्रिय थे। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी लाभ दिए जाएंगे, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। यह आत्मसमर्पण बस्तर अंचल में शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में एक और मजबूत संदेश माना जा रहा है। बस्तर पंडुम के उद्घाटन अवसर पर भी राष्ट्रपति ने माओवादियों से सरेंडर कर मुख्य धारा में लौटने और लोकतंत्र पर भरोसा रखने की अपील की है।

सुशासन की नीति की प्रभावशीलता : साय
बीजापुर जिले में 30 माओवादी कैडरों ने पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के तहत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। इन पर 85 लाख से अधिक का इनाम घोषित था। सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि यह बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में हमारी निरंतर कोशिशों का सकारात्मक परिणाम है। यह सुशासन की नीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन, गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर तेजी से विकसित बस्तर की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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