गरियाबंद जिले में दो नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों लंबे समय से जंगल में सक्रिय थे।
नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। 10 लाख रुपये के दो इनामी माओवादियों ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया और मुख्यधारा में लौट आए। छत्तीसगढ़ सरकार और शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तथा पुलिस की सतत अपील से प्रभावित होकर दोनों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। दोनों प्रतिबंधित संगठन सीपीआई नक्सलियों के डीजीएन डिवीजन में सक्रिय मेंबर थे।
पुलिस अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में एसडीके एरिया कमेटी सदस्य संतोष उर्फ लालपवन और सीनापाली एरिया कमेटी सदस्य मंजू उर्फ नंदे शामिल हैं। दोनों पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
अधिकारियों ने बताया कि संतोष उर्फ लालपवन मूल रूप से बीजापुर जिले का निवासी है। वह 2005 से माओवादी संगठन में सक्रिय था। वह विभिन्न दलम, प्लाटून और एरिया कमेटियों में कार्य करते हुए लंबे समय तक सीसी स्तर के नेताओं की सुरक्षा टीम में भी शामिल रहा। गरियाबंद और ओडिशा सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए वह कई गंभीर नक्सली घटनाओं, आईईडी ब्लास्ट और मुठभेड़ों में शामिल रहा, जिनमें पुलिस बल को नुकसान पहुंचा। इसके बाद में वह एसडीके और उदंती एरिया कमेटी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहा था।
वहीं, मंजू उर्फ नंदे सुकमा जिले की रहने वाली है और वर्ष 2002 से संगठन से जुड़ी थी। बाल संगठन से लेकर एलओएस, सीएनएम और एरिया कमेटी तक का सफर तय करते हुए वह सीनापाली एरिया कमेटी की सदस्य बनी। गरियाबंद-नुआपाडा सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए वह भी कई मुठभेड़ों में शामिल रही, जिनमें अनेक नक्सलियों ने मारे गए।

खोखली हो चुकी संगठन की विचारधारा
आत्मसमर्पण के दौरान दोनों नक्सलियों ने बताया कि खोखली हो चुकी है संगठन की विचारधारा। जंगलों में कठिन जीवन, लगातार हिंसा, बीमारी और असुरक्षा के बीच भविष्य अंधकारमय हो गया था। दूसरी ओर शासन की आत्मसमर्पण-पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता, आवास, स्वास्थ्य और रोजगार सुविधाओं तथा पहले आत्मसमर्पण कर चुके साथियों के बेहतर जीवन से वे प्रभावित हुए।

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