कोल कंपनी व सरकार को हो रहा नुकसान, एसईसीएल के निचले स्तर के अधिकारी भी हो रहे मालामाल

डीओ से कोयले के ग्रेड में चल रहा बड़ा खेल, डिपो में डंप कर माफिया मनमाने दाम पर व्यापारियों को बेच रहे कोयला

अंबिकापुर। कोयले के काले कारोबार में माफियाओं की बल्ले-बल्ले है। एसईसीएल के निचले अधिकारियों से सेटिंग कर ये हर माह करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। इसका हिस्सा उन अधिकारियों को भी जाता है, जो इन माफियाओं का भरपूर सहयोग करते हैं। सबसे बड़ा खेल डीओ से किया जाता है। डीओ अगर जी-11 ग्रेड के कोयला का होता है, एसईसीएल के अधिकारी उन्हें जी-9 ग्रेड का कोयला लोड कराते हैं। जी-11 ग्रेड का कोयला सस्ता जबकि जी-9 ग्रेड का कोयला महंगा बिकता है। साठगांठ से इस काम को अंजाम दिया जा रहा है। इसका नुकसान सरकार के साथ ही कोल कंपनियों को हो रहा है।
ताजा मामला एसईसीएल के महान-3 खदान से जुड़ा हुआ है। सूरजपुर जिले के चंदौरा पुलिस ने कोयले से लोड ट्रक पकड़ा। दस्तावेजों की जांच की गई तो ड्राइवर के पास 2 पिट पास मिला। एक पिट पास शहडोल तथा दूसरा सोनभद्र का था। इसमें पुलिस ने फर्जी पिट पास की कार्रवाई की, जबकि ट्रक में 55 टन की जगह 57 टन कोयला लोड था। यहां यह बात भी सामने आई कि कोयला भेजने वाली व कोयला लेने वाली कंपनी अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं, लेकिन दोनों के मालिक एक ही हैं। इस मामले में सूत्रों के हवाले से खबर आई कि यह मामला फर्जी पिट पास का नहीं, बल्कि जी-11 के डीओ में जी-9 ग्रेड के कोयले की चोरी का था। ये काम एसईसीएल अधिकारियों की बिना मिलीभगत के संभव ही नहीं है।

जानें, कैसे होता है खेल?
जब किसी खदान से वाहन में कोयला लोड होता है तो वह 3 विभागों की जांच से होकर गुजरता है। पहला टेक्निकल विभाग का इंस्पेक्टर कोयले की ग्रेड की जांच करता है, फिर कांटा में पदस्थ बाबू कोयले के ग्रेड के साथ ही वजन नापता है। अंत में पिट पास पर रोड सेल इंचार्ज द्वारा हस्ताक्षर किया जाता है, फिर एसईसीएल का गार्ड कोयला लोड वाहन को गेट से बाहर जाने देता है। उक्त मामले में तीनों ही जगह धांधली की गई। जी-11 ग्रेड के डीओ की जगह ट्रक में जी-9 गे्रड का कोयला पाया गया। वजन भी 2 क्विंटल अधिक निकला। यह बिना अधिकारियों के हो ही नहीं सकता।

मोटी सैलरी और सुविधाएं, लेकिन वफादारी नहीं
एसईसीएल द्वारा अधिकारियों को मोटी सैलरी के साथ ही आवास, मेडिकल समेत कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं, लेकिन कोल माफियाओं से साठ-गांठ कर ऐसे अधिकारी कोल कंपनी को ही करोड़ों का नुकसान पहुंचाते हैं। वे खुद मालामाल होने के साथ ही कोल माफियाओं को भी मालामाल कर रहे हैं। ये सस्ते डीओ पर महंगा कोयला माफियाओं को उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे सेटिंगबाज अधिकारी अपनी ही कंपनी के साथ वफादारी नहीं कर रहे हैं।

कार्रवाई की जरूरत
कोयले के कारोबार में लिप्त कोल माफिया हर माह एसईसीएल को करोड़ों रुपये का चूना लगाते हैं। कोयले का कारोबार करने वाले किसी भी व्यापारी को देख लें, उनके रहन-सहन व लग्जरियस लाइफ से उनकी कमाई का अंदाजा लगाया जा सकता है। इधर एसईसीएल को हर साल तो घाटे में दिखाया जाता है, सरकार को भी राजस्व का नुकसान होता है, लेकिन कोल माफिया करोड़ों में खेलते हैं। ऐसे कोल माफियाओं व उनसे सेटिंग करने वाले एसईसीएल अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है, तभी कोयले के कारोबार पर अंकुश लग पाएगा। यहां यह बताना भी लाजमी है कि इनकी जडं़े इतनी मजबूत हैं कि कोई भी इन पर हाथ नहीं डाल पाता है। काजल की कोठरी में सब दागदार हैं।

 

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