उदयपुर। सरगुजा जिले को कुपोषण से मुक्त करने जहां शासन कई योजनाएं संचालित कर रही है, वहीं लखनपुर विकासखंड में एक जगह ऐसा भी है जहां राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा जनजाति परिवारों के गर्भवती माताओं व बच्चों को पोषण आहार नहीं मिलने से बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। यहां आंगनबाड़ी केंद्र केवल कागजों में ही संचालित है, पोषण आहार भी कागजों में ही बांटकर लोगों को कुपोषण से मुक्त करने की बात कही जा रही है।

पूरा मामला सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम रेम्हला राईभवना आंगनबाड़ी केंद्र का है। इस आंगनवाड़ी केन्द्र में कार्यकर्ता पूजा यादव तथा सहायिका अनुराधा लकड़ा पदस्थ हैं। केंद्र में विशेष आरक्षित बच्चों की दर्ज संख्या 20 के करीब है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूजा यादव के मायके में निवास करने और सहायिका अनुराधा लकड़ा को परियोजना अधिकारी के द्वारा मौखिक रूप से भूरकुड़वा आंगनवाड़ी केंद्र में अटैच किए जाने की वजह से राईभवना का यह आंगनबाड़ी कई हफ्तों तक नहीं खुल पाता है। आंगनवाड़ी के नहीं खुलने से विशेष आरक्षित जनजाति के परिवार की गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों को गर्म भोजन, रेडी-टू-ईट सहित पोषण आहार की समय पर नहीं मिल पाता है, जिससे यहां के बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने विशेष आरक्षण प्राप्त इन जनजातियों के पोषण के लिए कई सारी योजनाएं संचालित की हैं, वावजूद अधिकारियों तथा स्थानीय स्तर के आंगनबाड़ी कर्मचारियों की लापरवाही व उदासीनता भरे रवैये के कारण इन योजनाओं का लाभ इन विशेष आरक्षण प्राप्त जनजातियों के परिवारों व उनके बच्चों को नही मिल पा रहा है। अब देखने वाली बात होगी की यहां निवास करने वाले विशेष आरक्षित पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोगों को आंगनवाड़ी केन्द्रों से गर्म भोजन, रेडी-टू-इट और पोषण आहार मिल पाएगा या फिर शासन के कुपोषण दूर करने के सारे प्रयास केवल आंगनवाड़ी के रजिस्टरों और परियोजना कार्यालय के दस्तावेजों तक हो सिमट कर रह जाएंगे।

तीन बच्चे गंभीर कुपोषित
राईभवना स्थित आंगनबाड़ी केंद्र अंतर्गत पहाड़ी कोरवा जनजाति के 6 माह से 3 वर्ष तक के दो व 3 वर्ष से 6 वर्ष तक एक गंभीर कुपोषित बच्चा है।
सुपरवाइजर ने कहा-बाहर जा रही हूं

सुपरवाईजर अनीता क्रस से फोन से बात करने पर उन्होंने कहा कि वे अंबिकापुर अपने काम से आई हैं, और बाहर जा रही हैं। आंगनवाड़ी केंद्र के नियमित संचालन के सवाल पर उन्होंने कुछ भी कहने से साफ इन्कार कर दिया, और सोमवार को बाहर से आने के बाद बात करने की बात कही।

दो दिन पहले खोली थी आंगनबाड़ी केंद्र
राईभवना आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका अनुराधा लकड़ा ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूजा यादव अपने मायके ग्राम बकमेर से आना-जाना करती हैं। दो दिन पूर्व आंगनबाड़ी केंद्र उनके द्वारा खोला गया था। परियोजना अधिकारी द्वारा उन्हें भूरकुड़वा आंगनवाड़ी केंद्र में अटैच कर दिया गया है। विशेष संरक्षित जनजाति के लोगों को पोषण आहार नहीं मिलना वह स्वीकार की।

मैं बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हूं, इसलिए कुछ नहीं कह सकता। मैं पूरे मामला को दिखवाता हूं।
असीम शुक्ला, परियोजना अधिकारी

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