शारीरिक रूप से विद्यमान रहने के बाद भी मतदाता फार्म भरने के लिए परेशान

अंबिकापुर। मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहे कार्यों को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय, राजीव भवन में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने सोमवार को ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष एवं मंडल अध्यक्षों की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इसके बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर गंभीर है। सांगठनिक ब्लॉक अध्यक्ष एवं वहां नवगठित मंडलों के अध्यक्षों सहित कांग्रेस के मोर्चा, विभाग एवं प्रकोष्ठ के अध्यक्षों को विशेष गहन पुनरिक्षण, एसआईआर की प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षण देने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी मतदाता का नाम इस प्रक्रिया के बीच न छूटे।
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने आगे कहा कि प्रशासन की ओर से घर-घर में हर व्यक्ति तक फार्म पहुंचाने की जिम्मेदारी बीएलओ को दी गई है। इन्हें घर में कोई मिले या न मिले, फार्म को घर में डाल देना है, इसके बाद निर्धारित तिथि के बीच कम से कम तीन बार फार्म की प्राप्ति के लिए बीएलओ को ऐसे घरों में पहुंचना है। उन्होंने कहा कि कई जगह से जानकारी मिल रही है कि कुछ बीएलओ घर-घर पहुंचने के बजाय एक जगह बैठकर संबंधितों को बुला रहे हैं। इनका हर घर में पहुंचना नहीं हो रहा है। पार्षदों को फार्म थमाने जैसी बातें भी सामने आ रही है। इसकी जानकारी उनके माध्यम से निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को दी जा रही है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के लिए उपलब्ध कराए जा रहे फार्म को भरना आसान नहीं है। वे स्वयं इस फार्म को भरने के बाद भी इस बात को लेकर चिंतित हैं, कि उन्होंने अपना फार्म सही भरा है या नहीं, नई मतदाता सूची में उनका नाम होगा या नहीं। बहू का फार्म जमा करने के लिए मध्य प्रदेश के किस पोलिंग में नाम था, उसका कॉपी मंगवाकर जमा करना पड़ा। इन सबके बाद भी मतदाता सूची प्रकाशन होने के बाद ही पता चलेगा कि कितने मतदाताओं का नाम जुड़ा या हटा। ग्रामीण क्षेत्र में मतदाताओं को और भी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। मतदाता के फोटो के बैकग्राउंड को लेकर भी भ्रम की स्थिति है। फोटो देने की अनिवार्यता नहीं, जैसी बातें भी सामने आ रही है। सिंहदेव ने कहा कि निर्वाचन आयोग को जिस प्रक्रिया को स्वयं पूरा करना था, उसका बोझ मतदाताओं पर डाल दिया है। इसे दोषपूर्ण पहलू ही कहा जाएगा कि जो मतदाता शारीरिक रूप से विद्यमान है, वह फार्म भरने के लिए परेशान हो रहा है। भारत के नागरिकता की पहचान का परीक्षण निर्वाचन आयोग को स्वयं कराना था, संदेह होने पर दावा-आपत्ति आमंत्रित करना था। इस दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, जेपी श्रीवास्तव, मधु दीक्षित, हेमंत सिन्हा, अनूप मेहता सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित थे।
फार्म भरते समय दें ध्यान
वर्ष 2003 के विशेष पुनरिक्षण में तैयार मतदाता सूचि में अगर किसी मतदाता का या उसके माता-पिता का नाम है तो उसे किसी और दस्तावेज को गणना प्रपत्र के साथ देने की आवश्यकता नहीं है। 2003 में दर्ज नाम का एक्सट्रैक्ट निकाल कर उसे गणना प्रपत्र के साथ संलग्न करना ही पर्याप्त रहेगा। निर्वाचन विभाग नेे मतदाताओं की सहायता करने बीएलओ को निर्देशित किया है। जिस मतदाता का जन्म 1 जुलाई 1987 के पूर्व हुआ है और अगर उसका नाम 2003 की मतदाता सूचि में नहीं है तो उसे स्वयं के जन्म एवं निवास से संबंधित दस्तावेज देना होगा, जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के मध्य हुआ है उन्हें स्वयं के साथ ही साथ उनके माता या पिता में से किसी एक का जन्म और निवास से संबंधित दस्तावेज देना होगा। जिन मतदाताओं का जन्म 2 दिसंबर 2004 के बाद हुआ है उन्हें अपने साथ अपने माता और पिता दोनों के जन्म एवं निवास से संबंधित दस्तावेज देना होगा।

 

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