भू-माफियाओं से मिलीभगत का परिणाम, 68 एकड़ भूमि अन्य व्यक्तियों के नाम पर रजिस्ट्री

घाटबर्रा के ग्रामीणों ने भूमि वापस दिलाने की मांग, कहा-बेघर होने की नौबत

अंबिकापुर। उदयपुर विकासखंड के ग्राम घाटबर्रा में 68 एकड़ पट्टे की भूमि तत्कालिक राजस्व कर्मियों व भू-माफियाओं के द्वारा साठगांठ और कूटरचना करके अन्य व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री करने तथा वास्तविक भू-स्वामी को मुआवजा से वंचित करने का मामला सामने आया है। भूमि स्वामियों के समक्ष विस्थापन व पुनर्वास की समस्या बन गई है। सोमवार को कलेक्टर के जनदर्शन में भूमि स्वामियों ने आवेदन देकर अपनी पीड़ा से अवगत कराया है, और जिम्मेदारों के विरूद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।

जनदर्शन में पहुंचे भूमि स्वामियों ने  शिकायत पत्र में अवगत कराया है कि ग्राम घाटबर्रा की भूमि अदानी परसा केते कोल ब्लॉक परियोजना हेतु अधिग्रहित किया गया है। उक्त ग्राम के भू-स्वामियों को अदानी कंपनी द्वारा मूल्यांकन के आधार पर मुआवजा भुगतान कर दिया गया है। आरोप है कि सन् 2015 के पूर्व अदानी परसा केते द्वारा उक्त ग्राम का सर्वे किया गया, ग्राम घाटबर्रा में निवासरत लोगों के निरक्षरता व अज्ञानत्ता का लाभ लेते हुए पूर्वजों के 84 प्लॉट, लगभग 68 एकड़ सेटलमेंट भूमि का तत्कालिक राजस्व कर्मियों व भू-माफियाओं ने खुद ही क्रेता-विक्रेता तैयार करके 45 अन्य व्यक्तियों के नाम पर छलपूर्वक रजिस्ट्री करा दिया। संतोषी विश्वकर्मा पति अशोक विश्वकर्मा का कहना है कि उसके पूरे जमीन और मकान का फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करा लिया गया है। इसके पहले उनके पिता ने करीब 2 एकड़ भूमि सहदेव को बेचा था। बाद में पता चला कि उनकी 18 एकड़ भूमि को अग्रवाल परिवार के नाम पर है। इलाके में अदानी के द्वारा नापजोख शुरू किया गया तो पता चला कि वे भूमिहीन हैं। जिस जमीन को वे अपना मान रहे थे, वह पहले ही किसी और के नाम पर दर्ज है। ननका पिता स्व. लातू राम 50 वर्ष के भाई ठीनू राम ने मात्र 2.43 एकड़ विक्रय किया है, वहीं छलपूर्वक लगभग 18 एकड़ भूमि खसरा, कुल 35 प्लॉट 22 अन्य व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री करा दिया गया है। श्रीमती परबतिया ने मात्र 20 डिसमिल जमीन ईश्वर अग्रवाल पिता स्व. रामधन निवासी राजमोहनी भवन के पास अंबिकापुर को विक्रय किया और रजिस्ट्री लगभग 20 एकड़ की हुई जिसमें मकान, 19 प्लॉट शामिल हैं। इसे क्रय 15 अन्य व्यक्तियों ने किया है। तिलमेत पुत्री स्व. रामचरण 68 वर्ष वर्तमान निवासी फुलचुही डांड़गांव ने मात्र 7 डिसमिल विक्रय करने के लिए सहमति दिया था, किन्तु घनश्याम यादव पिता स्व. बैजनाथ यादव ने 0.287 हे. भूमि अपने नाम रजिस्ट्री करा लिया। इसके साथ ही महिला के अज्ञानता व निरक्षरता का लाभ लेकर तत्कालिक राजस्व कर्मियों व भू-माफियाओं ने लगभग 19 एकड़ भूमि 25 अन्य व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री करा दिया। श्रीमती सुखबसिया पति स्व. गुलाल ने पट्टे की 4 डिसमिल भूमि को घनश्याम यादव पिता स्व. बैजनाथ यादव को विक्रय किया किन्तु लगभग 3 एकड़ भूमि की रजिस्ट्री हुई है। सुखदास पिता स्व. रामा दास 38 वर्ष निवासी ग्राम घाटबर्रा के परिजन अपने पट्टे की भूमि 10 डिसमिल घनश्याम यादव को ही विक्रय किए, किंतु लगभग 5 एकड़ भूमि वह अपने नाम करा लिया। पंचराम पिता स्व. भगसाय 66 वर्ष के परिजनों ने पटे की भूमि का लगभग एक एकड़ घनश्याम यादव को विक्रय किया किन्तु बाड़ी सहित लगभग 3 एकड़ भूमि की रजिस्ट्री हुई है। इसी प्रकार श्री ननका राम आ. स्व. तातू राम एवं श्रीमती परबतिया पुत्री स्व. झुरई के समस्त भूमि का मकान सहित अन्य व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री करा दिया गया, भूमि रजिस्ट्री होने से उक्त भू-स्वामी व उनके परिवार अधिग्रहित भूमि का मुआवजा प्राप्त करने तक से वंचित हो गए हैं। ये परिवार कहां विस्थापित किए जाएंगे, उनके पुनर्वास सहित शेष जीवन का क्या होगा, विचारणीय है। भूमि की मनमाफिक रजिस्ट्री का लगा बड़ा आरोप कहां तक सत्य है, यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन बड़े पैमाने पर ग्रामीणों के जमीन का किसी दूसरे के नाम दर्ज होना और जिम्मेदारों के द्वारा रोक नहीं लगाना सवालों के घेरे में है।

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