अंबिकापुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों ने 25 साथियों की बर्खास्तगी के विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन तेज कर दिया है। सोमवार को अंबिकापुर सहित छत्तीसगढ़ के 33 जिलों के एनएचएम कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को सामूहिक त्यागपत्र सौंपा। सरगुजा जिले के 500 से अधिक कर्मचारियों ने इस आंदोलन में भाग लेते हुए अपना इस्तीफा सौंपा और हड़ताल को समर्थन दिया।

एनएचएम संघ की जिलाध्यक्ष शिल्पी राय ने बताया कि सरकार ने 25 कर्मियों को बिना कारण बर्खास्त कर दिया, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश है। इसी के विरोध में 22 दिनों से राज्यभर में हड़ताल जारी है। अब तक 16 हजार से अधिक एनएचएम कर्मचारी इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक बर्खास्तगी वापस नहीं ली जाती और कर्मचारियों की मांगें नहीं मानी जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

ड्यूटी पर लौटने की अपील
सिविल सर्जन डॉ. जेके रेलवानी ने बताया कि ये कर्मचारी 18 अगस्त से हड़ताल पर हैं। शासन द्वारा बार-बार ड्यूटी पर लौटने की अपील की गई, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग का कार्य अत्यंत संवेदनशील है। इसके बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। आज दिए गए सामूहिक इस्तीफे की जानकारी शासन को भेजी जाएगी। हड़ताल के चलते शासकीय अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, जिससे आमजन को काफी परेशानी हो रही है।

बाइक पेड़ से टकराई, हादसे में वन रक्षक की मौत
अंबिकापुर. बलरामपुर जिले के सेमराखुर्द के पास रविवार की रात बाइक सवार वन रक्षक सडक़ हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसकी बाइक पेड़ से टकरा गई थी। घायल वन पाल को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। यहां चिकित्सकों ने जांच के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार रामअवतार राम पिता रामप्रीत राम उम्र 25 वर्ष बलरामपुर जिले के ग्राम मंगलसारा का रहने वाला था। वह वन विभाग में वन रक्षक के पद पर कार्यरत था। रविवार की रात 10 बजे वह ड्यूटी कर बाइक से घर लौट रहा था। रास्ते में सेमराखुर्द के पास बाइक अनियंत्रित होकर सडक़ किनारे पेड़ से टकरा गई। दुर्घटना में वन रक्षक गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे स्थानीय अस्पताल से रेफर करने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया था। यहां जांच के दौरान डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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