बिश्रामपुर। एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के एमडीओ मोड की केतकी खदान में एसकेएमएस एटक के नेतृत्व में ठेका श्रमिकों का 9 सूत्रीय मांग को लेकर 5 दिवसीय क्रमिक भूख हड़ताल के चौथे दिन क्षेत्रीय प्रबंधन एवं एसएमएस कंपनी द्वारा ठेका मजदूरों के हित में समझौता किया गया। 

गौरतलब है कि केतकी भूमिगत खदान में एटक यूनियन नेतृत्व में ठेका मजदूरों की मांग को लेकर 5 दिवसीय क्रमिक भूख हड़ताल पश्चात आमरण अनशन का किया जा रहा था। आंदोलन के चौथे दिन बिश्रामपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक की मध्यस्थता में बैठक आयोजित किया गया। बैठक में बिश्रामपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक संजय सिंह, क्षेत्रीय कार्मिक प्रबंधक एसकेपी शिंदे, एचआर हरेन्द तिवारी, केतकी खदान के मैनेजर विनम्र जैन, नागपुर महाराष्ट्र से आए एसकेएमपीएल के एचआर हेड निशांत बोरे, नरेश नागपुरे, आनंद तथा पेटी ठेकेदार तथा एटक यूनियन के क्षेत्रीय सचिव पंकज कुमार गर्ग, कार्यवाहक अध्यक्ष वीसी जैन, आरके द्विवेदी, सलमान खान, पोड़ी तथा जोबगा गांव के सरपंच हितेंद्र सिंह मरकाम, अजय पोर्ते, संत लाल, सोमार साय सहित 20 ठेका श्रमिक उपस्थित थे।

 करीब 2 घंटे चले बैठक के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ठेकेदार द्वारा काम से बिठाए गए करीब 15 ठेका श्रमिक को तत्काल काम पर लिया जाएगा, ठेका श्रमिकों को हाई पावर कमेटी द्वारा तय वेतन भुगतान होगा, किसी भी ठेकेदार द्वारा श्रमिकों से पैसा वापस नहीं लिया जाएगा, अगर ऐसी शिकायत मिलती है तो तत्काल ठेकेदार का ठेका रद्द करने उचित कार्यवाही किया जाएगा, हर महीने ठेका श्रमिक को वेतन पर्ची प्रदान होगा, ठेका श्रमिकों के आश्रितों बच्चो को चिकित्सा तथा शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी, खदान में रोजगार की आवश्यकता होने पर खान प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार प्रदान किया जाएगा, एसकेएमपीएल के अधीन रैली ग्रुप कंपनी में कार्यरत ठेका श्रमिक को सीएमपीएफ राशि का भुगतान हेतु दावा सीएमपीएफ कार्यालय जबलपुर भेज दिया गया है, अवंती इलेक्ट्रिकल में कार्यरत ठेका श्रमिकों को एरियर एवं बोनस राशि का भुगतान यदि बकाया होगा तो भुगतान किया जाएगा। केतकी भूमिगत खदान में कार्यरत सुरक्षा प्रहरियों को एचपीसी वेज का भुगतान हेतु एसईसीएल मुख्यालय से दिशा निर्देश प्राप्त होने पर किया जाएगा। समझौता के बाद केतकी खदान के मैनेजर एवं एसएमएस कंपनी के एचआर ने क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे ठेका श्रमिकों को जूस पिलाकर आंदोलन को समाप्त किया गया।

Categorized in: