म्योरपुर ब्लॉक के घने चितपहरी जंगल में परमाणु ऊर्जा विभाग की एक टीम ने एक बेहद गोपनीय अभियान शुरू किया है। बताया जा रहा है कि विभाग ने यहां 11सौ फीट गहराई तक खुदाई कर यूरेनियम की संभावित उपस्थिति की पुष्टि करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के म्योरपुर ब्लॉक में स्थित चितपहरी जंगल में परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने बड़े पैमाने पर यूरेनियम खनन की खोज शुरू की है. बताया जा रहा है कि विभाग ने यहां 11सौ फीट गहराई तक खुदाई कर यूरेनियम की संभावित उपस्थिति की पुष्टि करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार, सोनभद्र के चितपहरी जंगल में खनिजों की संभावना की जांच के लिए यह खुदाई शुरू की गई है. प्रारंभिक सर्वेक्षणों में इस क्षेत्र में यूरेनियम के भंडार होने के संकेत मिले हैं. विभाग ने अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों, जैसे कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और स्पेक्ट्रोमीटर डिवाइस, का उपयोग कर हवाई और जमीनी सर्वेक्षण किए हैं. यह अभियान सोनभद्र के कुदरी पहाड़ी क्षेत्र में केंद्रित है, जहां पहले भी खनिजों की मौजूदगी की संभावना जताई गई थी.

यदि यूरेनियम की पुष्टि होती है,तो यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को एक नई दिशा देगा। देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और कोयले पर निर्भरता को देखते हुए यूरेनियम जैसी परमाणु ईंधन संपदा का मिलना सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।बता दें कि यह खोज भारत की परमाणु ऊर्जा नीति को मजबूती देने में अहम साबित होगी।

परमाणु ऊर्जा विभाग का दावा है कि यदि इस क्षेत्र में यूरेनियम के भंडार की पुष्टि होती है, तो यह न केवल ऊर्जा क्षेत्र के लिए बल्कि स्थानीय विकास के लिए भी महत्वपूर्ण होगा. खनन गतिविधियों से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं, और बुनियादी ढांचे का विकास हो सकता है. हालांकि, विभाग ने यह भी आश्वासन दिया है कि खनन प्रक्रिया में पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन किया जाएगा ताकि स्थानीय पारिस्थितिकी और समुदायों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.

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