बिलासपुर। मोपका-सेंदरी बाईपास रोड से यदि कभी आपको गुजरने का मौका मिला होगा तो निश्चित तौर पर आप ये सोच रहेंगे होंगे कि यहां सड़क में गड्ढा है या फिर गड्ढे में सड़क? हालांकि अब इसकी स्थिति सुधरने की संभावना दिख रही है क्योंकि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर और आसपास की सड़कों की खराब स्थिति को लेकर स्वत:संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने अधिकारियों से पूछा है कि- सड़क बनाने की पूरी प्रक्रिया क्या है, आप टेंडर करते हैं, जांच करते हैं और फिर काम पूरा होता है तो फिर साल भर के भीतर ही सड़कें उधड़ने क्यों लगती हैं? आखिरकार सड़कों की गुणवत्ता पर ध्यान क्यों नहीं है? न्यायलय ने जिला प्रशासन और नगर निगम को इस मामले में 26 जुलाई से पहले जवाब दाखिल करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 26 और 30 जुलाई को होगी।

36 करोड़ की लागत से बनी सड़क हुई बर्बाद
हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। बिलासपुर-मोपका सेंदरी बाईपास रोड को करोड़ों की लागत से तैयार किया गया है लेकिन इसकी बदहाली अब हर तरफ चर्चा में है। बीते दिनों इस सड़क से केंद्रीय राज्य मंत्री तोख़न साहू गुजरने वाले थे लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध-प्रदर्शन के बाद उन्हें उल्टे पांव वापस लौटना पड़ा। हालांकि बाद में पुलिस ने प्रदर्शन करने वाले बारह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। मोपका सेंदरी बाईपास रोड को साल 2016 में 36 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था लेकिन एक साल के भीतर ही यहां गड्ढों की भरमार हो गई। चौंकाने वाली बात ये है कि इस सड़क की मरम्मत के लिए प्रशासन ने 5 करोड़ रुपये अभी हाल ही में खर्च किए हैं लेकिन अब भी यहां से गुजरना किसी एडवेंचर से कम नहीं है।

मल्हार इलाके की सड़कें भी बदहाल
ठीक इसी तरह से मल्हार इलाके की सड़कें भी बदहाल है। यहां किसी भी वाहन को चलाना लगभग नामुमकिन जैसा है। अब हाईकोर्ट ने इन्हीं मामलों पर सभी संबंधित विभागों से शपथ पत्र दाखिल कर 26 जुलाई तक जवाब मांगा है। हाई कोर्ट के अधिवक्ता आशुतोष के मुताबिक हाईकोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सड़कों की खराब स्थिति पर संबंधित विभागों को जिम्मेदारी दिखानी होगी। इस मामलों की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश बिभु दत्त गुरु की बेंच ने की है। जिसमें महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भरत,अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल शशांक ठाकुर और नगर निगम के अधिवक्ता ए.एस. कच्छवाहा ने पैरवी की है। बिलासपुर नगर निगम की तरफ से अधिवक्ता के ए .एस. कच्छवाहा ने बताया की इस पूरे मामले में अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल कर दिया जाएगा। उन्होंने अदालत को बताया कि इन सभी सड़कों की मरम्मत के लिए समय-समय पर काम किया जाता है।

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