बिलासपुर। जिले के रतनपुर और आसपास के गांवों में दूषित पानी पीने से डायरिया तेजी से फैल रहा है। यहां अब तक 69 मरीज मिले है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अब नए मरीजों के लिए बेड तक नहीं बचे हैं। बावजूद इसके अस्पताल में व्यवस्था ठीक नहीं है। यहां बारिश का पानी टपक रहा है और गंदगी फैली है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर कह रहे हैं कि सब ठीक है, हालात सुधर रहा है। जानकारी के मुताबिक, यहां पिछले 4 दिनों से केवल एक डॉक्टर लगातार ड्यूटी पर हैं। स्टाफ की कमी है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर उदासीन बने हैं। जबकि, यहां डायरिया जैसे जलजनित बीमारी का संक्रमण लगातार फैल रहा है और मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

4 इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित
रतनपुर क्षेत्र में डायरिया के 69 मरीज सामने आए हैं, जिनमें 9 का इलाज रतनपुर में और 2 का सिम्स में चल रहा है। 37 बेड वाले अस्पताल पूरी तरह से फूल है। 4 जुलाई दो नए मरीज सामने आए। वहीं बीते चार दिनों में 28 मरीजों को भर्ती किया गया है। पिछले दो दिनों से रोजाना 10 से 14 मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। नवागांव, कर्रा, गिरजाबंद और महामायापारा सबसे अधिक प्रभावित इलाके हैं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, ज्यादातर मरीजों को उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन की शिकायत है, जिनका समय पर इलाज जरूरी है।

दूषित जलापूर्ति बीमारी का कारण
बारिश में रतनपुर और आसपास के कई गांवों में गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है। नवागांव और गिरजाबंद में हर गली में मरीज मिल रहे हैं, लेकिन अब तक किसी गांव में हेल्थ कैंप नहीं लगाया गया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। वे घरेलू उपायों से इलाज करने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ दवा वितरण तक सीमित है।

सीएमएचओ का दावा- सामान्य हो रही स्थिति
CMHO डॉ. शुभा गरेवाल ने रतनपुर, मस्तूरी, मल्हार समेत कई स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा किया। उन्होंने मौसमी बीमारियों से बचाव और सिकल सेल एनीमिया जांच तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रतनपुर में डायरिया को लेकर स्थिति सामान्य हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम सतत निगरानी कर रही है।

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