अंबिकापुर। महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा शुक्रवार को शहर में धूमधाम से निकली। श्रद्धालुओं ने रथयात्रा का जगह-जगह स्वागत किया और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा बहन की पूजार्चना की। भजन-कीर्तन एवं महाप्रभु के जयकारे से पूरा शहर भक्तिमय हो गया। रथ को खींचने श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर से जोड़ा पीपल, गांधी चौक, संगम चौक होते हुए देर शाम को दुर्गाबाड़ी स्थित महाप्रभु के मौसी गुंडीचा के घर पहुंची, यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व बहन सुभद्रा को स्थापित किया गया। यहां से नौ दिनों बाद महाप्रभु की घर वापसी होगी।
केदारपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर में सुबह रथयात्रा से पूर्व परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना हुई। मान्यता है कि जेठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ विशेष स्नान करते हंै। इस स्नान के बाद वे बीमार हो जाते हैं और एकांतवास में चले जाते हैं।
भगवान के एकांतवास में जाने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे, स्वस्थ होने बाद भगवान जगन्नाथ ने गुरूवार को पहली बार अपने दर्शन दिए और उनका नेत्रोत्सव मनाया गया। इस दौरान कलश, चक्र आदि की विधि-विधान से पूजा की गई, वहीं मंदिर में उभजात्रा पूजा की गई। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर उत्कल समाज व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति द्वारा वृहद पैमाने पर तैयारियां की गई है, परंपरानुसार शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन भगवान स्वस्थ होकर गुडिचा यात्रा पर अपने मौसी के घर जाने के लिए निकले हैं। शुक्रवार को रथयात्रा के पूर्व केदारपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर में सुबह से ही महाप्रभु के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ था। रथयात्रा के पूर्व डॉ. राजेंद्र नारायण परीडा व उनकी धर्मपत्नी डॉ. भावना परीडा ने भगवान व रथ की विधि-विधान से पूजा की। पूजा-अर्चना व आरती के बाद भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शहर में निकली, इसमें उत्कल समाज व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के लोगों सहित आमजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए और दोपहर में पारंपरिक पूजा के साथ महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा माता की प्रतिमा को फूलों से सजे रथ पर वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच स्थापित कर रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा जोड़ा पीपल होते हुए चोपड़ापारा स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंची, यहां पूजा के बाद शहर के मुख्य मार्गाेें का भ्रमण करके रथ देर शाम को देवीगंज रोड स्थित दुर्गा बाड़ी पहुंची, जिसे स्थानीय स्तर पर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। रथयात्रा का शहर में श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह स्वागत किया गया और महाप्रभु की पूजा की गई। ढोल, नगाड़े, घंटी की थाप पर श्रद्धालु झूमते रहे। इससे पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। रथ को खींचने लोगों में खासा उत्साह रहा। बच्चे, महिलाएं, युवा व बुजुर्ग रथ खींचने के लिए लालायित रहे। रथ जैसे-जैसे आगे बढ़ता गया श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई।
जगह जगह रथयात्रा का स्वागत
रथयात्रा का जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। शहर के कई स्थलों पर रथयात्रा में शामिल लोगों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई थी। जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा के जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक के नेतृत्व में घड़ी चौक पर उत्कल समाज के द्वारा आयोजित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की वार्षिक रथयात्रा का स्वागत किया गया एवं विधि-विधान से पूजन की गई।
नौ दिन बाद वापस लौटेंगे महाप्रभु
मौसी के घर से भगवान जगन्नाथ सहित बलभद्र एवं उनकी बहन सुभद्रा की नौ दिनों बाद घर वापसी होगी। मौसी के घर पर उत्कल समाज द्वारा नौ दिनों तक महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा बहन की परंपरागत ढंग से पूजा की जाएगी। इसके बाद उनको वापस श्रद्धालुओं द्वारा रथ पर बैठाकर केदारपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर लाया जाएगा। मौसी के घर में विश्राम करने के बाद भगवान जगन्नाथ पुन: अपने मंदिर में पहुंचेंगें।

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