भि_ीकला में किया गया दफन, 3 माह महीने तक अश्व प्रजाति के पशुओं का आवागमन प्रतिबंधित
अंबिकापुर। सरगुजा जिले में दो मादा अश्वों में खतरनाक संक्रामक बीमारी ग्लैण्डर्स की पुष्टि राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार में 5वीं बार भेजे गए ब्लड सैंपल के बाद हुई है। सैंपल पॉजिटिव आने के बाद प्रोटोकॉल के तहत इन घोड़ों को जहर का इंजेक्शन देकर मारा गया और भिट्टीकला में दफना दिया गया है। इसके साथ ही अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में अगले 3 माह के लिए अश्व प्रजाति के पशुओं के आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं नया रायपुर के पत्र दिनांक 26 जून के अनुसार संचालक राष्ट्रीय अनुसंधान केन्द्र हिसार के संलग्न पत्र द्वारा अश्व प्रजाति के रैन्डम सीरो सर्विलांस हेतु अंबिकापुर, जिला सरगुजा के दो मादा अश्वों के प्रेषित किए गए सैंपल में ग्लैण्डर्स रोग की पुष्टि की गई थी। उक्त अश्व नवापारा अंबिकापुर निवासी उमेश के हैं, जिनमें ग्लैण्डर्स रोग पॉजिटिव होने की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इन्हें पशुओं में संक्रामक और संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 2009 के अनुक्रम में अधिसूचना राज्य शासन के द्वारा किए जाने के लिए प्रस्तावित किया गया था। तत्संबंध में सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर के द्वारा भारत में ग्लैंडर्स के नियंत्रण और उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना 2019 खंड-4 रोग (ग्लैण्डर्स) की घटना की स्थिति में राज्य/संघ, राज्य क्षेत्र पशुपालन विभाग की जिम्मेदारियां तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने के लिए आदेश जारी किया गया था। उक्त कार्रवाई के तहत संक्रमित पशु के विनष्टीकरण हेतु जिला प्रशासन से पुलिस बल, निगम कर्मचारी, स्वास्थ्य कर्मचारी एवं पशुपालन विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों की ड्यूटी सुनिश्चित की गई थी। बताया जा रहा है कि अश्व पालक के एक मादा अश्व में ग्लैण्डर्स का लक्षण दिखने के बाद उसके साथ रखे गए दूसरे मादा अश्व का सैंपल जांच के लिए हिसार भेजा गया था। चार बार की जांच में एक अश्व की रिपोर्ट पॉजिटिव और दूसरे की निगेटिव आई थी, लेकिन 5वीं बार भेजे गए सैंपल की जांच में दोनों का सैंपल पॉजिटिव पाया गया। नियमानुसार, ग्लैण्डर्स की पुष्टि के लिए दोनों सैंपल का पॉजिटिव होना जरूरी है। प्रोटोकॉल के तहत पहले घोड़ों को बेहोश करने के बाद जहर का इंजेक्शन देकर मारने के बाद दफन कर दिया गया है। अश्व के मालिक को शासन की ओर से आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी।
पठारी इलाके में अधिकतर पाले जाते हैं घोड़े
विदित हो कि पठारी क्षेत्रों में आज भी घोड़े पाले जाते हैं। इनका उपयोग सामान ढोने और व्यक्तिगत आवागमन के साथ ही पर्यटकों के घूमने में होता है। मैनपाट में भी घोड़े पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहते हैं। बताया जा रहा है कि सरगुजा जिले में कुल 30 घोड़े हैं। संक्रमित मादा अश्व को दो अन्य घोड़ों के साथ पालक ने रखा था। इनमें से एक की पहले ही मौत हो चुकी है। ग्लैण्डर्स संक्रमण अश्व प्रजाति के पशुओं के अलावा मानव व अन्य पशुओं में तेजी से फैल सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन की ओर से सख्त कदम उठाए गए, ताकि संक्रमण न बढ़े।
अश्व रथ वैवाहिक मौके पर आते हैं नजर
शहर में वैवाहिक आयोजनों के मौके पर अश्व की सवारी का प्रचलन बढ़ रहा है। विवाह के सीजन में अश्व रथ लेकर शहर में लोग पहुंचते हैं। कई बार प्रचार-प्रसार के लिए आकर्षक अश्व रथ लेकर घूमते इन्हें देखा गया है। इसके अलावा खच्चर और ऊंट के साथ भी दिगर प्रांतों से लोगों का आना होता है। ग्लैण्डर्स नामक खतरनाक बीमारी की दो मादा अश्वों में पुष्टि होने के बाद ऐसे पशुओं का प्रवास प्रतिबंधित रहेगा।
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कलेक्टर ने इनकी लगाई थी ड्यूटी
संक्रमिक मादा अश्वों को मारने व दफनाने की प्रक्रिया पूरी करने के दौरान मौके पर पुलिस बल की उपस्थिति रही। संक्रमित पशु के संपर्क में आए व्यक्तियों का नमूना जांच के लिए लेने स्वास्थ्य विभाग से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सरगुजा की टीम डटी रही। संक्रमित क्षेत्र से 5 किलोमीटर एवं 25 किलोमीटर की परिधि उपलब्ध कराने हेतु राजस्व विभाग से अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की ड्यूटी लगाई थी। भारत में ग्लैंडर्स के नियंत्रण और उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना 2019 के अनुसार कार्य करने के लिए पशुपालन विभाग से जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया था। इसमें डॉ. आरपी शुक्ला उपसंचालक, डॉ. अरूण कुमार सिंह अतिरिक्त उपसंचालक, डॉ. रूपेश सिंह वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, डॉ. विकास जायसवाल, डॉ. अमित कुमार वर्मा, जिला पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला पशुपालन विभाग से डॉ. संगीता अग्रवाल अतिरिक्त उपसंचालक, डॉ. फेन्कलीन टोप्पो वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, रागिनी गुप्ता, पीयूष तिवारी, पुष्पक पटेल लैब परिचारक, इच्छामृत्यु और वध के लिए डॉ. संजय अग्रवाल अतिरिक्त उप संचालक, डॉ. पीएल सोरी, डॉ. आशीष महंत, विकासखंड स्तरीय समिति पशुपालन विभाग से डॉ. ज्योति साहू, डॉ. सुनील मिंज, डॉ. आशीष महंत, डॉ. प्रताप गहिरवार, दफन टीम और कीटाणुनाशक में पशुपालन विभाग की डॉ. संगीता अग्रवाल अतिरिक्त उपसंचालक के साथ 3 चिकित्सकों व 5 परिचारकों की ड्युटी लगाई गई थी।

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