बिश्रामपुर। रेल यात्रियों के लिए आरक्षण केंद्रों की भीड़भाड़ और टिकट न मिलने की समस्या के पीछे जो सच्चाई छिपी थी, वह सामने आ गई। रेलवे सुरक्षा बल की अपराध गुप्तचर शाखा अनूपपुर की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रेलवे टिकट कारोबार में लिप्त एक सरकारी कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़कर मामले का खुलासा किया है। रेलवे पुलिस ने बताया कि अवैध रेल टिकट कारोबार में लिप्त बैकुंठपुर शहरी रेलवे आरक्षण केंद्र में पदस्थ 33 वर्षीय अविनाश कुमार पिता शंभु सिंह निवासी वार्ड क्रमांक 17 नवापारा सरडी, थाना चरचा कोरिया को मुखबिर की सूचना पर हिरासत में लिया गया है। रेल टिकटों के अवैध कारोबार में पकड़ाए कर्मचारी अविनाश कुमार ने पूछताछ में बताया कि वह अंबिकापुर निवासी संजय कुमार विश्वकर्मा के कहने पर रेलवे का टिकट बनाता था। संजय कुमार विश्वकर्मा हमेशा बनारस, मुंबई, हावड़ा, दिल्ली, चेन्नई आदि बड़े जगहों की टिकट बनवाता था, जिसके एवज में उसे अच्छी खासी मोटी रकम भी देता था। कर्मचारी के कब्जे से बड़ी मात्रा में अवैध रेल टिकट भी जब्त किया गया है। कर्मचारी अविनाश के कबूलनामे से साफ हो गया है कि इस अवैध धंधे का नेटवर्क बेहद व्यापक है। सूत्रों के अनुसार यह रैकेट मुंबई, हावड़ा, दिल्ली और चेन्नई जैसे शहरों से संचालित हो रहा है, जहां बैठे मास्टरमाइंड दलाल स्थानीय कर्मचारियों की मिलीभगत से टिकटों का खेल चला रहे हैं। यह गिरोह आरक्षण केंद्रों पर लगने वाली लंबी कतारों और टिकट न मिलने की समस्या का भरपूर फायदा उठा रहा था। फिलहाल रेल पुलिस ने मामले में रेल अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए अविनाश को हिरासत में ले लिया है और पूरे रैकेट की जांच शुरू कर दी है। अब इस अवैध कारोबार का मुख्य सरगना सहित इसमें कितने लोगों की सहभागिता है, की गुप्तचर विभाग बारीकी से पड़ताल कर रही है। रेल पुलिस ने बताया कि आम यात्रियों को टिकट न मिलने की वजह से उठती परेशानी का एक बड़ा कारण अब सामने आया है। अवैध टिकट बिक्री से रेलवे को भारी राजस्व नुकसान होता है। इस पूरी कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक आरके साहू और प्रधान आरक्षक भूपेंद्र कुमार तिवारी की भूमिका सराहनीय रही। रेलवे सुरक्षा बल अब संजय कुमार विश्वकर्मा और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

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