सरगुजा जिले में सात शालाओं का समायोजन, 2055 स्कूलों में 2048 यथावत संचालित होंगे
अंबिकापुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशा-निर्देशों के अनरूप शिक्षकों और शालाओं का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। जिले में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूर्ण कर ली गई है। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। ऐसे विद्यालय जहां अधिक शिक्षक कार्यरत हैं, उनका कम शिक्षक वाले विद्यालयों में समायोजन करने से सभी विद्यालयों में समानुपातिक शिक्षकों की व्यवस्था होगी। युक्तियुक्तकरण से लगभग 90 प्रतिशत बच्चों को 3 बार प्रवेश की प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी, बच्चों के पढ़ाई में गुणवत्ता के साथ निरंतरता भी बनी रहेगी। बच्चों के ड्रापऑउट दर में कमी आएगी। जिले में 07 शालाओं का समायोजन किया जा रहा है। जिले में 2055 स्कूलों में से 2048 स्कूल यथावत संचालित होंगे। उक्त बातें शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के संबंध में शुक्रवार को जिला कलेक्टरेट सभाकक्ष में प्रेसवार्ता के दौरान कलेक्टर विलास भोसकर ने कही।
जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार अग्रवाल ने बताया कि जिले में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया 3 एवं 4 जून को मल्टीपरपज विद्यालय के कैम्पस में पारदर्शी तरीके से हुई। शिक्षकों ने अपने मनचाहे स्कूलों का चयन किया। संपूर्ण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने हेतु इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई है। सरगुजा जिले में 3 जून को प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की काउंसलिंग की गई, जिसमें 302 शिक्षकों को एकल शिक्षकीय एवं शिक्षक विहीन विद्यालयों में समायोजित किया गया। 4 जून को पूर्व माध्यमिक शाला, हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल के 146 शिक्षक एवं व्याख्याताओं का समायोजन किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा ने बताया कि जिले में कुल 993 अतिशेष शिक्षक हैं, जिसमें से 448 शिक्षक समायोजित हुए, 545 अतिशेष शिक्षक समायोजन शेष हैं। प्रेसवार्ता में एपीसी रविशंकर पांडेय, संबंधित अधिकारी तथा मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
यहां लम्बे समय विषय विशेष के शिक्षकों का रहा अभाव
जिला पंचायत के सीईओ ने बताया कि जिले के कई ऐसे हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल थे जहां लम्बे समय से भौतिकी, रसायन, गणित, अंग्रेजी, जीव विज्ञान के शिक्षक नहीं थे, वहां शिक्षकों के समायोजन से जिले की शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत होगी। इन स्कूलों में हाईस्कूल कटिंदा, सहनपुर, सरभंजा, खड़गांव, फुलचुही, फतेहपुर, बटवाही, डांड़केसरा शामिल हंै। संभाग के सबसे बड़े स्कूल मल्टीपर्पज जहां लगभग 1800 दर्ज संख्या है, यहां 7 व्याख्याताओं को समायोजित किया गया। उन्होंने बताया कि जिले में 14 प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन एवं 224 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं, इन विद्यालयों में काउंसलिंग के माध्यम से शिक्षकों की आपूर्ति कर ली गयी है। प्राथमिक स्कूलों में 302 शिक्षक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 36 शिक्षकों की आवश्यकता थी जिन्हें समायोजन से पूर्ण कर लिया गया है। प्राथमिक शालाओं में 139 एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं में 287 शिक्षक अतिशेष हैं, जिन्हें क्रमश: काउंसिलिंग के माध्यम से समायोजित किया जाएगा।
इन स्कूलों को काउंसलिंग दौरान मिले व्याख्याता
जिपं सीईओ ने बताया हाई स्कूल अजिरमा में वाणिज्य विषय के व्याख्याता पदस्थ हंै, जबकि हाईस्कूल में वाणिज्य कक्षा का संचालन नहीं होता है। लखनपुर कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में वाणिज्य के व्याख्याता पदस्थ हैं, जबकि वाणिज्य में एक भी छात्राएं अध्ययनरत नहीं हैं, इन्हें आवश्यकता वाले विद्यालयों में काउंसलिंग से भेजा गया। कन्या उ.मा.वि. लुण्ड्रा, उ.मा.वि. गुमगराकला, उ.मा.वि. लहपटरा, उ.मा.वि. बकिरमा में अभी तक भौतिकी विषय के व्याख्याता पदस्थ नहीं थे, इन स्कूलों को व्याख्याता मिले। सरगुजा जिले में एक ही परिसर में संचालित कुल 206 पीएस, एमएस, एचएस, एचसस विद्यालयों का समायोजन किया गया है। एक ही परिसर में स्थित विद्यालयों को समाहित कर क्लस्टर मॉडल विकसित किया जा रहा है। सुव्यवस्थित भवन, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी, खेल मैदान, खेल सामग्री एक ही जगह देना आसान होगा।

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