अंबिकापुर। अंबिकापुर-रामानुजगंज नेशनल हाइवे मार्ग में पेंच रिपेयरिंग के लिए बारिश के समय ताकत झोंकी जा रही है। हिंदुओं के प्रमुख महापर्व छठ, महाशिवरात्रि जैसे मौके पर सड़क के गड्ढों को भरने के प्रति अरूचि का प्रदर्शन करने वाला विभाग ऐसे समय में सड़क निर्माण कार्य करने में लगा है, जब मौसम प्रतिकूल है। सड़क निर्माण में न सिर्फ अनेदखी की जा रही है बल्कि काफी लापरवाही भी बरती जा रही है, ऐसे में लगाए जा रहे पैबंद का टिकना मुश्किल है। हाल में तो यह देखने को मिल रहा है कि रिपेयरिंग की चल रही खानापूर्ति के साथ सड़क उधड़ते जा रही है। इस नजारे को खुली आंखों से मौके पर जाकर अधिकारी स्वयं देख सकते हैं। एनएच की बदहाली को छिपाने के लिए बारिश से पूर्व डामरीकरण का काम पूरा करने प्री मानसून में सड़क बनाना सवालों के घेरे में है, जबकि डामरीकृत सड़क निर्माण के लिए प्रीमिक्स मटेरियल को निर्धारित टेम्परेचर में रखना जरूरी है, तभी सड़क में पकड़ बनती है। यहां तो बरसते पानी में ही सड़क के कायाकल्प का अभियान छेड़ दिया गया है।
बता दें कि अंबिकापुर-रामानुजगंज मार्ग कहने को नेशनल हाइवे की सड़क है, लेकिन शहर सीमा से ही इस मार्ग में गड्ढों से साक्षात्कार होने लगता है। शहर के शंकरघाट में छठ पूजा व महाशिवरात्रि के दौरान उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ को देखते हुए इस मार्ग के गड्ढों को भरने का आग्रह पूजा समितियों के साथ ही जनप्रतिनिधियों ने किया था, लेकिन किसी ने सड़क निर्माण के प्रति रूचि लेना उचित नहीं समझा। गड्ढों को पाटने के नाम पर खानापूर्ति की गई, जिस कारण छठ व्रतियों को नंगे पांव गिट्टी, पत्थर की चुभन सहते पूजा-पाठ के लिए आना-जाना पड़ा। प्रशासन की ओर से भी भक्तों को होने वाली असुविधा को देखते हुए सड़क निर्माण के लिए किसी प्रकार के सख्त दिशा-निर्देश नहीं दिए गए। अब जब प्री-मानसून की स्थिति है, तो बरसते पानी में पेंच रिपेयरिंग कराया जा रहा है। इस दौरान प्रीमिक्स मटेरियल से लेकर रोलिंग के दौरान के टेम्परेचर का रिकॉर्ड दर्ज करने का प्रावधान है, लेकिन इसका पालन कितना किया जा रहा होगा, इसे बारिश में गड्ढों को पाटने की प्रक्रिया से आसानी से समझा जा सकता है। शुक्रवार के बाद शनिवार को बारिश के बीच सड़क बनाने का काम चलते रहा। अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़े लेते हैं कि सड़क में कोई खराबी या दिक्कत आती है, तो ठेकेदार उसे ठीक करेगा।

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