बलरामपुर। जिले के राजपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अंतर्राज्यीय साइबर अपराधियों के ठगी के नए तरीके का पर्दाफाश किया है। आरोपी च्वाइस सेंटरों पर एजेंट बनाकर भेजे जाते थे और खाता नंबर लेकर बड़ी रकम की ठगी कर रहे थे। इस गिरोह ने अंबिकापुर में लगभग 10 लाख रुपये तथा राजपुर में करीब 1 लाख 86 हजार रुपये की ठगी की है। पुलिस की सक्रियता से अन्य च्वाइस सेंटरों को भी ठगी का शिकार होने से बचा लिया गया है।
राजपुर थाना प्रभारी कुमार चंदन सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर घेराबंदी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में मेरान अंसारी (20) निवासी ग्राम ओलदहा बाना मारगी मुण्डा जिला देवघर (झारखंड) और अनुप कुमार चौथे (30), निवासी ग्राम केतात घाना रेहला, जिला पलामू (झारखंड) शामिल हैं। दोनों आरोपी वर्तमान में शिय्यारी कॉलोनी, गांधीनगर, सरगुजा में किराए के मकान में रह रहे थे। पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया है और मामले में अग्रिम विवेचना कार्रवाई कर रही है। पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों का नेटवर्क कमजोर होने की संभावना बलवती हुई है।
राहुल उर्फ शंकर दादा भेजा था ठगी के लिए
राहुल कुमार कश्यप (24), निवासी खुटनपारा राजपुर, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज ग्राहक सेवा केंद्र संचालित करते हैं। उन्होंने बताया कि 23 अप्रैल 2025 को दो अज्ञात व्यक्ति उनके केंद्र पर आए और खाता नंबर देने के नाम पर 1 लाख 86 हजार रुपये नगद ले लिए। कुछ समय बाद खाता होल्ड होने पर उन्हें ठगी का आभास हुआ और उन्होंने तत्काल राजपुर पुलिस को इसकी सूचना दी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस ने क्षेत्र के सभी सीएससी केंद्रों को सतर्क किया। जांच में पता चला कि अन्य केंद्रों से भी खाता नंबर लेकर दो युवक निकले थे और वे चौधरी गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे। पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि झारखंड के देवघर निवासी राहुल उर्फ शंकर दादा ने उन्हें एजेंट बनाकर ठगी करने के लिए भेजा था। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 318(4), 3(5) बीएनएस और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 की धारा 66(डी) के तहत कार्रवाई करते हुए इन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।

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