हरियाणा में जुनैद और नासिर की मौत को लेकर निर्मित हो रही पूरी तस्वीर पहली दृष्टि में हैरत में डालती है। राजस्थान पुलिस द्वारा इस हत्याकांड में मोनू मानेसर आदि नामजद आरोपितों के पक्ष में जगह-जगह सभाएं हो रही हैं, पंचायतें बैठ रही हैं, लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, अधिकारियों को ज्ञापन दिया जा रहा है…। लोगों की मांग है कि मामले की जांच राजस्थान पुलिस की जगह सीबीआइ करे। सामान्य तौर पर ऐसा नहीं हो सकता कि वाहन में जलाकर किसी को मार दिया जाए और उसके आरोपित के पक्ष में धीरे-धीरे विशाल जनसमूह खड़ा हो जाए।

पिछले दिनों हरियाणा के भिवानी जिले में एक बोलेरो जली हुई हालत में मिली, जिसमें नरकंकाल पड़े थे। बाद में बताया गया कि राजस्थान में भरतपुर जिले के गांव घटमीका के जुनैद और नासिर को बोलेरो में जलाकर मारा गया है। बोलेरो की पहचान होने के बाद राजस्थान के भोपालगढ़ थाने में जुनैद और नासिर के रिश्तेदार इस्माइल ने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें पांच लोगों के विरुद्ध पहले अपहरण का मामला दर्ज किया गया और बाद में हत्या की धाराएं भी जोड़ दी गईं। आरोपितों की संख्या अब आठ हो गई है। इस बात का कोई जवाब नहीं है कि भरतपुर से जुनैद और नासिर बोलेरो से भिवानी पहुंच गए या पहुंचाए गए, लेकिन पुलिस की नजर नहीं पड़ी? अगर उनका अपहरण किया गया, जैसा परिवार के लोग बता रहे हैं और उनकी बेरहम पिटाई की गई थी जिससे वे बुरी हालत में थे, तब भी इतनी दूरी तक चले गए, यह गले नहीं उतरता।

हरियाणा पुलिस भी प्रश्नों के घेरे में है। वैसे अभी तक न गाड़ी और कंकाल की फारेंसिक जांच हुई है और न डीएनए टेस्ट ही, जिससे अभी यह कहना कठिन है कि गाड़ी कैसे जली? कंकाल जुनैद और नासिर के ही थे, यह भी कानूनी रूप से सत्यापित होना शेष है। कहा जा रहा है कि जुनैद और नासिर गोतस्करी में संलिप्त थे। इनके विरुद्ध दर्ज मामले सामने आए हैं। जुनैद और नासिर ही नहीं, गोवंश के अवैध व्यापार में शामिल अन्य लोगों की भी गोरक्षकों के साथ अनेक बार मोर्चाबंदी हो चुकी है। इस कारण दोनों पक्ष में तनातनी भी रहती थी। कई गोरक्षकों के बारे में इनके साथियों और परिजनों को पूरी जानकारी थी।

प्रश्न उठता है कि जुनैद और नासिर को नामजद आरोपितों ने ही बोलेरो में जलाकर मार डाला, इसकी जानकारी परिवार को कैसे मिल गई? खबर आते ही ये लोग कैसे नाम लेकर कहने लगे कि वही अपहरण कर ले गए थे और उन्होंने ही मारा है? अपहरण हुआ तो पहले पुलिस में शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई गई? ऐसे अनेक प्रश्नों के उत्तर नहीं मिलते। वाकई बोलेरो में जलाकर मारा गया तो इसके अपराधियों को नि:संदेह सजा मिले। बावजूद इसके इस घटना को जैसा बताया जा रहा है वैसा तब तक स्वीकार करना कठिन है, जब तक विश्वसनीय जांच से पुष्टि न हो जाए।

जुनैद और नासिर को गोरक्षकों ने कहां पकड़ा होगा? गाड़ी में किसी को जलाकर मारना आसान नहीं होता। दो, चार, पांच लोग ऐसा नहीं कर सकेंगे। जुनैद और नासिर अगर जानते थे कि गोरक्षक दुश्मन हैं तो वे उनके कहने से आसानी से गाड़ी नहीं रोक सकते थे। परिवार का आरोप है कि फिरोजपुर झिरका की पुलिस अपराध अन्वेषण एजेंसी यानी सीआइए ने गाड़ी को ठोकर मार कर रोका और उन्हें गोरक्षकों के हवाले कर दिया। गोरक्षकों की पिटाई से बुरी तरह घायल दोनों को पुलिस ने अपने संरक्षण में नहीं लिया तो उन लोगों ने उन्हें गाड़ी में ही जला दिया। फिर वही प्रश्न उठता है कि इतनी जानकारी घर वालों को कहां से मिल गई?

लग रहा है कि यह घटना गंदी राजनीति में फंस गई है। ऐसे बयान दिलवाने के पीछे कुछ लोगों की भूमिका हो सकती है। बिना सुबूत के नाम लेकर प्राथमिकी दर्ज कराना यूं ही नहीं हो सकता। पुलिस से लेकर कुछ स्थानीय नेता संदेह के घेरे में आ रहे हैं। हिंदुओं के लगातार विरोध तथा गोरक्षकों की सतर्कता के बावजूद गोवंश की तस्करी जैसा अपराध जारी रहना बगैर तंत्र की मिलीभगत के संभव नहीं है। मोनू मानेसर जैसे लोग इनके रास्ते की बाधा हैं, इसलिए संभव है कि जानबूझकर उनका नाम दिलवाया गया। संभव है घटना को अंजाम किसी और ने षड्यंत्रपूर्वक दिया हो। यह बात समझ से परे है कि गोरक्षक गोतस्करों को अपने क्षेत्र में जलाकर स्वयं के विरुद्ध पुलिस को प्रमाण क्यों देंगे?

हरियाणा और राजस्थान, दोनों के मेवात क्षेत्र में गोवंश को लेकर तनातनी किसी से छिपी नहीं है। गोवंश का अवैध व्यापार न हो तो गोरक्षक दलों के खड़े होने की आवश्यकता ही नहीं होती। हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन गोवंश के प्रति अपनी धार्मिक भावनाओं के कारण संवेदनशील हैं। हिंदुओं का आरोप है कि न केवल यहां प्रशासन की मिलीभगत से गोहत्या होती है, बल्कि उनका मांस और बिरयानी तक बेचे जाते हैं। दोनों क्षेत्र के गैर-मुस्लिमों के भीतर इसे लेकर काफी आक्रोश है और दलीय सीमाओं से परे गोरक्षक समूहों को आम लोगों का पूरा समर्थन मिलता है।

अगर पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी का पालन करते हुए गोतस्करों के विरुद्ध समुचित कानूनी कार्रवाई करती तो यह नौबत आती ही नहीं। इस हत्याकांड की सीबीआइ जांच करेगी तो उसका दायरा निश्चित रूप से व्यापक होगा और उसमें गोवंश तस्करी और हत्याएं तथा व्यापार के पूरे तंत्र के बारे में जानकारी आएगी। इससे स्थानीय पुलिस प्रशासन और नेताओं की भूमिका भी पकड़ में आ सकती है। इसलिए राजस्थान या हरियाणा सरकार को सीबीआइ जांच की सिफारिश करने में संकोच नहीं होना चाहिए।

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