रायपुर – राज्य के स्कूलों में शिक्षकों के 63 हजार 53 पद खाली है। इसमें सीधी भर्ती में रिक्त 43 हजार 601 पद को तो छोड़िए पदोन्नति के ही 19 हजार 452 पद रिक्त है। राज्य का हाल कुछ ऐसा है कि 5840 स्कूल तो केवल एक ही शिक्षक के भरोेसे चल रहे हैं।

जानकारों के मानें तो हर साल राज्य में 8 हजार पद शिक्षकों के रिक्त हो जाते हैं, लेकिन विभाग शिक्षकों की भर्ती अवसर देखकर करती है। इसका खामियाजा स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ता है। सवाल ये भी आता है कि यदि ऐसी ही स्थिति रही तो ऐसे में क्या शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकेगा। क्योंकि शिक्षक नहीं रहेंगे तो बच्चों को पढ़ाएगा कौन?

शिक्षा विभाग के डाटा के अनुसार, 63 हजार 53 पदों में से 19 हजार 452 पद पदोन्नति और 43 हजार 601 पद सीधी भर्ती के हैं। इसमें सहायक शिक्षक के 33178 में सभी पद सीधी भर्ती के हैं। ऐसे ही शिक्षक के 10 हजार 883 में से 5442 पद सीधी भर्ती और 5441 पद पदोन्नति के है। व्याख्याता के 9246 पदों में 4623 सीधी और 4623 पदोन्नति के, प्रधान पाठक प्राथमिक शाला के 2119 में से सभी पद पदोन्नति और प्रधान पाठक माध्यमिक शाला के भी सभी 4045 पद पदोन्नति के हैं। साथ ही प्राचार्य के 3582 पदों में से 358 पद सीधी भर्ती और 3224 पद पदोन्नति के हैं।

रिक्त पदों के लिए प्लान
एक्सपर्ट की मानें तो शिक्षा विभाग में खाली होने वाले रिक्त पदों के लिए पहले से ही प्लान करना चाहिए। यदि इस साल कोई पद खाली हो रहे है तो उससे पहले ही जितने भी पद है उसे लेकर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। जिनको पदोन्नति करनी है उनका भी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाना चाहिए। इससे विभाग में शिक्षकों की कमी नहीं होगी।

5840 स्कूल में 1 टीचर
यूडीआईएसई प्लस द्वारा इस साल जारी किए गए रिपोेर्ट के अनुसार, राज्य के सरकारी स्कूलों में कुल 1 लाख 88 हजार 721 शिक्षक कार्यरत हैं, जिसमें से राज्य सरकार के स्कूल में 1 लाख 86 हजार 657 शिक्षक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के एक स्कूल में शिक्षकों का औसत 5 है। वहीं, 5 हजार 840 स्कूल ऐसे है जहां एक ही शिक्षक कार्यरत हैं।

सुनियोजित तरीके से हो भर्ती
राज्य में अभी 63 हजार पद शिक्षकों के रिक्त हैं। कई स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं है। इसका असर शिक्षा के गुणवत्ता पर पड़ रहा है। सरकार को इसपर सुनियोजित तरीके से भर्ती करनी चाहिए।

 

 

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