शासन के निर्देश पर खोले गए स्कूल, पहले दिन स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही ७० प्रतिशत


अंबिकापुर. कोरोना संक्रमण के कारण लगभग 11 महीने से सुनसान पड़े स्कूलों में सोमवार से स्कूल खुलते ही रौनक लौट आई है। लंबी अवधि के बाद 9वीं से 11वीं की पढ़ाई शुरू हुई है। ऐसे में सुबह से ही स्कूलों में चहल-पहल बढ़ गई। छात्रों में स्कूल जाने को लेकर उत्साह देखा गया। सुबह निर्धारित समय से छात्र.-छात्रा स्कूल पहुंचने के साथ व्यक्तिगत दूरी का अनुपालन करते हुए अपनी कक्षा में प्रवेश किए। कक्षा में प्रवेश करने से पहले छात्रों ने अपने हाथों को सैनिटाइज किया। कोविड गाइड लाइन का अनुपालन करते हुए छात्रों को क्लासरूम में बैठने की व्यवस्था की गई। जिले के मल्टीपरपज स्कूल में स्कूल खुलने के पहले दिन सोमवार को ७० प्रतिशत विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। बच्चे अपने सही समय पर स्कूल पहुंच गए थे। स्कूल में कोरोना से बचाव हेतु लागू नियमों का पालन किया गया। सभी विद्यार्थियों व शिक्षकों के चेहरे पर मास्क नजर आए। विद्यार्थियों के हर टेबल पर सेनिटाइजर व बच्चे आपस में दूरी बनाकर बैठे नहर आए। वहीं शिक्षकों में भी उत्साह देखा गया।
कोरोना महामासरी फैलने के साथ ही बंद हुए समस्त विद्यालय व महाविद्यालय बंद कर दिए गए थे। लगभग ११ महीने स्कूल व कॉलेज बंद रहे। हालांकि इस दौरान शासन के निर्देश पर मोहल्ला व ऑनलाइन क्लास शुरू रहा। वहीं ११ महीने बाद शासन के निर्देश पर पुन: शासकीय व गैर शासकीय स्कूल- कॉलेज को पुन: खोल दिया गया। जिले के मल्टीपरपज स्कूल में स्कूल खुलने के पहले दिन सोमवार को ७० प्रतिशत विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। बच्चे अपने सही समय पर स्कूल पहुंच गए थे। स्कूल में कोरोना से बचाव हेतु लागू नियमों का पालन किया गया। सभी विद्यार्थियों व शिक्षकों के चेहरे पर मास्क नजर आए। विद्यार्थियों के हर टेबल पर सेनिटाइजर व बच्चे आपस में दूरी बनाकर बैठे नहर आए। वहीं शिक्षकों में भी उत्साह देखा गया। वहीं क्लास रूम को स्कूल खुलने से एक दिन पूर्व ही साफ सफाई व सेनिटाइजेशन करा दिया गया था। लंबी अवधि के बाद स्कूल खुलने से सोमवार सुबह से ही छात्रों में स्कूल जाने को लेकर उत्साह का माहौल देखा गया। हो भी क्यों न लगभग 11 महीने बाद उन्हें अपने स्कूल एवं अपने मित्रों से मिलने का मौका मिल रहा था। 9वीं कक्षा में पढऩे वाली छात्राओं ने बताया कि लग रहा है मानों हम पिजड़े से मुक्त हो गए हैं। इतने समय बाद स्कूल आना बहुत अच्छा लग रहा है। अपने स्कूल में पहुंचकर आज बहुत ही खुशी महसूस हो रही है। वहीं छात्र विकास ने बताया कि इस कोरोना काल में हमारी पढ़ाई बुरी तरह से बाधित हुई है। आनलाइन पढ़ाई हो रही थी, मगर स्कूल में आकर पढ़ाई करने का कुछ अलग ही मजा है। वहीं शिक्षकों में भी उत्साह का माहौल देखा गया।

मार्च में होनी है परीक्षा
कोरोना संक्रमण काल में लगभग ११ महीने स्कूल कॉलेज पूरी तरह से बंद रहे। एक महीने बाद मार्च में परीक्षा होनी है। इस लिए विद्यार्थियों व शिक्षकों पर कोर्स पूरा करने का दबाव बढ़ा हुआ है। शिक्षकों का कहना है कि जो परीक्षा में संभावित सवाल हाने वाले हैं उसी तरह के सवाल को हल कराया जा रहा है। ताकि बच्चे असानी से हल कर सकें। वहीं शासन द्वारा सीबीएसई द्वारा २५ प्रतिशत चैपटरर कम कर दिया गया है। वहीं सीजी बोर्ड ने १०-१२वीं का ३० प्रतिशत चैपटर कम कर दिया है। वहीं असाइमेंट से भी परीक्षा में नंबर दिए जाने का नियम बनाया गया है।

ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की कम रही उपस्थिति
स्कूल खुलने के पहले दिन ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की स्कूल में कम उपस्थिति रही। इसका कारण शिक्षकों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले बच्चे होस्टल, लॉज या किराए के रूम में रहकर पढ़ाई करते हैं। कोरोना काल में होस्टल, लॉज को बंद कर दिया गया था। वहीं जो बच्चे किराए में रहकर पढ़ाई करते थे वह वापस अपने घर चले गए थे। अब स्कूल खुलने के बाद अपना व्यवस्था जमा कर स्कूल आना शुरू करेंगे।