सुनील दास
राजनीति की बिसात व शतरंज की बिसात में कुशल खिलाड़ी वह होता है जो बेहतरीन चाल पहले चलता है। राजनीति व शतरंझ में एक बेहतरीन चाल से आप का पलड़ा भारी हो जाता है, जनता की अदालत में आप कह सकते हैं कि देखों हम तो पहले से कह रहे थे कि निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है, निर्दोष लोगों को परेशान किया जा रहा है। जिस संगठन के पदाधिकारियों का नाम आएगा, सरकारी जांच एंजेसी उससे पूछताछ करेगी, गिरफ्तार करेगी तो वही कहेगा कि हमारे लोगों को अनावश्यक परेशान किया जा रहा है।

जब भी कोई ब़ड़ी घटना होती है तो उसके पीछे कुछ लोग होते हैं, कुछ संगठन होते हैं। बलौदाबाजार की घटना में कई संगठनों के लोग शामिल हैं। इसका पता तो बिना जांच के चल नहीं सकता इसलिए सरकारी जांच एंजेसियां इस मामले की जांच कर रही है, निरंतर लोगों से पूछताछ की जा रही है, निरंतर लोगों की गिरफ्तारी की जा रही है। अब तक १३२ लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनके खिलाफ कुछ न कुछ तो मिला होगा। घटना हो जाने के बाद भाजपा को छोड़कर कांग्रेस सहित सारे दलों की कोशिश यही होगी कि सरकारी एजेंसी की जांच पर ही सवालिया निशान लाग दिया जाए कि यह जांच निष्पक्ष नहीं हो रही है,यह जांच निष्पक्ष तो नहीं हुई है।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल का दावा है कि बलौदाबाजार मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो आरोपी भाजपा के नेता ही निकलेंगे। इससे पहले भूपेश बघेल ने बयान दिया था कि बोदाबाजार में हुई हिंसा सरकार की नाकामी की वजह से हुई है।उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि सरकार अपनी नाका्मी छिपाने के लिए असली दोषी लोगों को छोड़कर निर्दोष लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सरकारी जांच रिपोर्ट आने से पहले ही कांग्रेस को बचाने के लिए जमीन तैयार कर ली है। भूपेश बघेल ने कहा है कि निष्पक्ष जांच हुई तो बलौदाबाजार मामल में आरोपी भाजपा नेता ही निकलेंगे।

स्वाभाविक है कि सरकारी जांच एजेसी की रिपोर्ट में कांग्रेस सहित कई संगठनों के लोगों के नाम होंंगे। यह जांच रिपोर्ट आते ही कांग्रेस कहेगी कि हम तो पहले ही कह रहे थे कि निष्पक्ष जांच होगी तो भाजपा के नेता ही आरोपी निकलेंगे, जांच में भाजपा नेता आरोप नहीं निकले हैं तो इसका मतलब है कि जांच निष्पक्ष नहीं हुई है, जांच के दौरान भाजपा नेताोओं को बचा लिया गया है और निर्दोष लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेसी अगर ठोस सबूत नहीं जुटा पाती है तो लोग काेर्ट से बरी हो जाएंगे।कांंग्रेस सहित कई संगठनों के नेता आसानी से सरकार पर आरोल लगाएंगे कि सरकार न तो बलौदाबाजार हिंसा को रोक सकी और न ही हिंसा करने वालो को सजा ही दिला सकी।

सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि बलौदाबाजार मामलें में कुछ लोगों को तो सजा हो। बिना सबूत के सजा हो नहीं सकती, इसलिए सरकारी जांच एजेंसी को सबूत तो जुटाना होगा। सबूत नही जुटा पाई तो इसका राजनीतिक नुकसान भाजपा को उठाना पड़ेगा. अभी तो राजनीति की बिसात पर भूपेश बघेल की बयानों के मोहरे बिठा रहे हैं। उनकी पूरी तैयारी कांग्रेस को पाकसाफ व भाजपा को ही बलौदाबाजार मेामले में दोेषी ठहराने की है।

सरकार की तैयारी क्या है, यह तो अभी पता नहीं चल रही है, सरकार का पक्ष तो तब सामने आएगा जब सरकारी जांच एंजेसी की रिपोर्ट सार्वजनिक होगी। सरकार व विपक्ष दोनों तरफ से तैयारी जारी है,दोनों के अलावा अमित जोगी व भीम आर्मी वाले चंद्रशेखर भी आने वाले दिनों में मैदाने में आने वाले है, इससे सरकार खिलाफ कुछ और मोर्च खुल जाएंगे।भूपेश बघेल की तरह उनकी भी कोशि्श होगी कि बलौदाबाजार मामले को सरकार की असफलता बताकर सरकार को ही सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया जाए।

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