रामानुजगंज- गुरु घासीदास सतनाम फाउंडेशन (नेशनल एजुकेशनल एवं पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ऑफ इंडिया) द्वारा मानवतावादी सन्त शिरोमणि गुरु घासीदास जी के जीवन मिशन पर आधरित ऑनलाइन राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी (वेबिनार) आयोजित की गई जिसमें छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश,  महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश व दिल्ली राज्य के विद्वतजन सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ डाँ. हेमन्त पाल के पंथी गीत से हुआ। ट्रस्ट की ट्रस्टी (कोषाध्यक्ष) हेमलता घृतलहरे ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि ट्रस्ट के द्वारा  शिक्षा सेवा साधना के मार्ग पर चलकर लगातार समाजसेवा के कार्य किए जा रहे हैं। मुख्य अतिथि के रूप में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली की प्राध्यापिका व प्रख्यात आलोचक प्रो. हेमलता महिश्वर ने गुरु घासीदास व उनके सतनाम आंदोलन को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु घासीदास समतामूलक समाज की स्थापना करना चाहते थे और स्त्री की पीड़ा के प्रति अत्यंत संवेदनशील थे। उनका सतनाम आंदोलन स्त्री के पक्ष में खड़ा है। स्रोत वक्ता डाँ. रामायण प्रसाद टंडन (प्राध्यापक) ने सतनाम आंदोलन को वैचारिक आंदोलन बताया और गुरु घासीदास व गुरु बालक दास के योगदान को सामने रखा। स्रोत वक्ता डाँ. स्वामी राम बंजारे (प्राध्यापक) ने कहा कि सतनाम आंदोलन कुप्रथाओं के त्याग व उन्नत खेती के माध्यम सें स्वावलंबी जीवन और आर्थिक क्रान्ति लेकर आया। स्रोत वक्ता डाँ. एस.एल. निराला (प्राचार्य उच्च शिक्षा) ने कहा कि सतनाम आंदोलन रक्तहीन गौरवपूर्ण क्रान्ति थी जिसने अहिंसा के मार्ग पर चलकर सामाजिक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाया। स्रोत वक्ता डाँ. अनिल भतपहरी (सहायक संचालक उच्च शिक्षा) ने कहा कि सतनाम एक अन्तर्यात्रा है जो सद्गुण एवं नैतिकता के माध्यम सें जीवन को ऊर्ध्वगामी बनाती है। स्रोत वक्ता डाँ. दादू लाल जोशी (संपादक) का विषय था सतनाम साहित्य। अध्यक्षता कर रहे डाँ. जे.आर. सोनी (अध्यक्ष गुरु घासीदास शोध पीठ रायपुर) ने कहा कि देश में सतनाम की तीन शाखाएं हैं जिनमें उन्होंने नारनौल  शाखा, कोटवा शाखा, छत्तीसगढ़ शाखा के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन डाँ. हेमन्त पाल घृतलहरे ने किया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में विशेष रूप  से इंजीनियर गजेन्द्र पाल, प्रो. हित नारायण टंडन, डाँ.अनसूया अग्रवाल, डाँ. देवी प्रसाद वर्मा, डाँ. शालिनी, डाँ. दिलीप सोनवणे, डाँ. लीना डेहरिया, डाँ. बबलू सिंह, प्रो. विजय लक्ष्मण साठे, डाँ. आर. बी. सोनवानी, प्रो. एस. के. धारी, बाबूलाल लहरे, सत्यनारायण सोनंत, रमेश आगरे, शत्रुहन धीवर, दिनेश यादव, राम केवल यादव, थानेदार दिनेश कुर्रे, राजेश्वर साण्डे, रुपाली, जॉनी राय, संध्या लहरे, डाँ. मनी राम बंजारे, प्रो. पी. डी. सोनकर, प्रो. राजकुमार लहरे, पर्वत कृष्णा,  श्याम कुमार साहू, मनोहर सिंह बरनाला, जगजीवन जांगड़े, ओमकार कुशवाहा, अमृत लाल ज्योति, डाँ. पी. प्रसाद, सन्तोष कुर्रे, लक्ष्मण दिनकर, प्रो. रावेंद्र साहू, रेखा देवी, योगेन्द्र पाल, डाँ. मुक्ता कौशिक, परमेश कुमार पैकरा व बड़ी संख्या में शोध छात्र व सुधीजन उपस्थित थे। सभी आयोजन की बहुत सराहना की।

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