अम्बिकापुर- कोरोना वायरस देश के साथ-साथ अब प्रदेश में भी तांडव मचाने लगा है भारत आज कोरोना वायरस से प्रभावित होने वाला तीसरा देश बन चुका है, अभी तक इस महामारी से लड़ने के लिए कोई दवा या वैक्सीन नही आई है। इससे लड़ने के लिए शारीरक दूरी, मास्क पहना और अन्य सरकारी आदेशो का पालन करना अनिवार्य है पर शायद राजनेताओ के लिए नियम और अनुशासन दोनो ही नही है।

संसदीय सचिव पारसनाथ राजवाड़े द्वारा किया गया कार्यक्रम इसका एक जीता जागता सबूत है। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि कार्यक्रमों में उनके कार्यकर्ताओ ने शारीरिक दूरी, मास्क पहनने जैसे दिशानिर्देशों का का पालन नही किया है। संसदीय सचिव पारसनाथ राजवाड़े रायपुर से संसदीय सचिव का पद ग्रहण कर अपने क्षेत्र पहुंचे और फिर अन्य आयोजित कार्यकर्मो में शिरकत की लेकिन जिस तरह की तस्वीर कार्यक्रमों में देखने को मिली उससे तो यह बात साफ हो गया है की लोगो मे अब इस वायरस के प्रति सावधानी खत्म होती दिख रही है।

प्रदेश में धारा 144 भी लागू है जिसके तहद कोई भी सार्वजनिक स्थानों पर 5 लोगो से ज्यादा की भीड़ को नही इकट्ठा किया जा सकता है पर क्या शासन इन कार्यक्रमों को धारा 144 के उल्लंघन की नज़रों से देखता है और अगर देखता है तो क्या इस पर कोई कार्यवाही होगी या नही ? पुलिस की लाठी सिर्फ मजबूर और लाचार लोगो पर ही बरसती है जब वो सड़को पर मास्क पहन कर नही घूमते है। क्या ये वायरस राजनेताओ को नही छू सकता, क्या ये वायरस उनके समर्थकों को नही छू सकता ? एक राजनेता के कंधों पर जनता की ज़िम्मेदारी होती है, अगर राजनेता ही इस महमारी के दौर में सतर्क नही है तो फिर जनता से भी इस वायरस के प्रति सतर्कता की अपेक्षा नही करनी चाहिए। आज छत्तीसगढ़ में चार हज़ार से भी ज्यादा कोरोना वायरस के मामले है, हालांकि ठीक हुए मरीजो की संख्या भी 3,500 से अधिक है, पर क्या इसी तर्ज को देखते हुए हमें सार्वजनिक सभाओं के आयोजन करते रहने चाहिए, और क्या आयोजनों में हमे सभी प्रोटोकोल्स को नज़रअंदाज़ करते रहना चाहिए। अगर ऐसे सार्वजनिक सभाओ का आयोजन कोई आम इंसान करता तो उसके खिलाफ प्रशासन शक्त से शक्त कार्यवाही करती लेकिन जब जनता के प्रतिनिधित्व करने वाले लोग ही प्रोटोकोल्स को तोड़ने का उदाहरण जनता के सामने जोरो-शोरो से रखते है तो क्या हमें ये उम्मीद करनी चाहिए कि जनता भी सरकारी आदेशो का पालन पूरे अनुशासन के साथ करेगी ? क्या प्रशासन इन कार्यक्रमों को कोरोना वायरस के प्रोटोकोल्स के उल्लंघन जैसा देखेगा या फिर राजनेताओं के लिए कोरोना वायरस के प्रोटोकोल्स का उल्लंघन करना आम है?

बता दें कि जब से पारसनाथ राजवाड़े अपने गृह क्षेत्र भटगांव प्रवेश किए हैं तब से वो अपना सारा वक्त राजनीतिक कार्यक्रमों में दे रहे हैं इन कार्यक्रमों में न तो उनके कार्यकर्ताओं मास्क पहन रहे हैं और ना ही सोशल डिस्टेंस का पालन कर रहे हैं , संसदीय सचिव व उनके कार्यकर्ता जगह-जगह सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे है। और कोरोना वायरस को आमंत्रित कर रहे हैं पारसनाथ राजवाड़े जब से संसदीय सचिव बनकर बन आए है तब से हजारों कार्यकर्ताओं के संपर्क में आ चुके हैं।

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