कर्मचारी एवं श्रमिक नेता अनिल श्रीवास्तव ने वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहां की शोषित एव सर्वहारा वर्ग ने अपना शुभचिंतक खो दिया शत शत नमन हमारे बीच वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव भैया जीवन और मृत्यु पर किसी का अधिकार नहीं होता परंतु कुछ लोग जीवन को जीवंत करते हैं यादगार बनाते हैं उनमें से एक थे हमारे प्रिय राव भैया मैंने कभी उन्हें टेंशन में या नाराज होते नहीं देखा हंसमुख चेहरा मैं 1990 से उन्हें जानता हूं 30 वर्ष हो गए सतत संपर्क में था 1990 में मेरी मुलाकात वर्तमान राज्यपाल भवन और पूर्व में सर्किट हाउस में जब मध्य प्रदेश के तत्कालीन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह जी छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए थे और मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार थी विधानसभा चुनाव होने वाले थे मैं उनसे कर्मचारियों की समस्याओं के संबंध में चर्चा करने गया था की यदि आप की सरकार आई तो कर्मचारियों के बारे में आप क्या करेंगे और मैंने अनुकंपा नियुक्ति एवं अन्य विषयों पर दिग्विजय सिंह जी से चर्चा की और ज्ञापन भी सौंपा मेरे साथ मृतक कर्मचारी के परिवार के सदस्य भेजें श्री दिग्विजय सिंह के साथ मोहन राव भैया एवं m.a. जोसेफ भैया बैठे हुए थे मेरे दिग्विजय सिंह से दो टूक बात करता देख कर शायद वह मुझ से प्रभावित हुए उस समय तक मैं उन्हें नहीं जानता था कि नवभारत के वरिष्ठ पत्रकार हैं जब मिलकर मैं बाहर आया तो वे लोग भी बाहर आए और अपना परिचय बताते हुए दोनों ने हंसते हुए कहा तुम तो यार एकदम बजा देते हो आखिर उन्होंने मैंने जो ज्ञापन दिया था दिग्विजय सिंह जी को अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में उन्होंने मुझसे लिया मृतक कर्मचारी के परिवार के सदस्यों से उन्होंने चर्चा की और दूसरे दिन जब मैंने नवभारत में देखा तो अनुकंपा नियुक्ति को लेकर बहुत जबरदस्त समाचार आया था मैं उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका फिर मैं नवभारत पेपर जाकर उनका धन्यवाद दिया और मैं मीडिया से पहले बार रूबरू हुआ मीडिया को जाना और मीडिया से लगातार निकटता बढ़ती गई नव भारत में उस समय मोहनराव भैया ऐमेजो सेफ भैया अनिल शुक्ला भैया और संपादकीय में श्री ठाकुर भैया प्रमुख वरिष्ठ पत्रकार थे उनके साथ पारीक भी अभी थे निश्चित रूप से नवभारत पेपर को आज जिस मुकाम पर है उस मुकाम पर पहुंचाने में इनकी टीम का बहुत बड़ा हाथ है उसने मोहन राव भैया वरिष्ठ पत्रकार है उस समय राजेश जोशी नए-नए पत्रकार के रूप में नव भारत में प्रवेश किए थे जो वर्तमान में नवभारत के संपादक हैं मोहन राव जी निर्भीक निष्पक्ष निडर पत्रकारिता के प्रतीक थे प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया के दायित्वों का निर्वाह मैंने देखा है वह जहां भी रहे आत्म सम्मान के साथ अपने दायित्वों का निर्वाह किया मीडिया जगत के लिए यह जाना पहचाना नाम सिर्फ नाम ही काफी है मोहन राव भैया आज हमारे बीच नहीं है परंतु हमारे लिए उनके द्वारा की गई निर्भीक निष्पक्ष पत्रकारिता प्रेरणा के स्रोत है और हमेशा रहेगी मोहन राव भैया को मैं 30 वर्षों से जानता था और बहुत ही जिंदादिल इंसान थे आप बहुत ही टिपटॉप से रहते थे टी शर्ट फुल पैंट बेल्ट उनके कपड़ों में कभी से कम नहीं होती थी ना ही चेहरे में बहुत ही रिजर्व रहते थे उनसे बात करने में भी लोगों को 5 बार सोचना पड़ता था विशेष रुप से दिक्कत राजनेताओं को मैंने मोहन राव भैया एवं ऐमे ए जोसेफ भैया को जुगल जोड़ी के रूप में जाना आज उनकी स्मृतियां हमारे पास रह गए 1990 से लेकर 30 वर्ष मैंने कर्मचारियों के लिए श्रमिकों के लिए जो भी आंदोलन किया हड़ताल किया बड़ी बड़ी हड़ताल हुई मुझे न्याय दिलाने में मोहन राव भैया जिस भी अखबार में रहे हो प्राथमिकता से कर्मचारी एवं श्रमिकों की मांग को अखबार में स्थान दिया और सरकार का ध्यान आकर्षित किया साथ ही कर्मचारी और श्रमिकों का मनोबल बढ़ाया छत्तीसगढ़ के 10 लाख कर्मचारियों एवं श्रमिकों की ओर से मोहन राव भैया को शत शत नमन

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