वन अधिकार पट्टा की भूमि पर की थी खेती, रकबा ऑनलाइन नहीं होने समिति धान खरीदने से किया इंकार


अंबिकापुर. राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र और विशेष संरक्षित पंडो किसान कर्ज में डूबे हुए हैं। पंडो किसानों की धान खरीदी नहीं होने से समिति से लिए गए कर्ज को चुकाने की चिंता सता रही है। ग्राम मृगाडांड़ के करीब सात पंडो किसान ऐसे हैं जो वन अधिकार पट्टा की भूमि के आधार पर समिति से खेती करने के लिए कर्ज लिए लेकिन अब धान बेचने की बारी आई तो वन अधिकार पट्टा की भूमि होने का हवाला देकर समिति प्रबंधक धान खरीदी करने से मना कर दिया है।
केंद्रीय राज्य मंत्री और सरगुजा सांसद रेणुका सिंह का गोद ग्राम होने के बावजूद सबसे ज्यादा परेशान राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष संरक्षित जनजाति के पंडों किसानों की है। सहज और सरल जीवन जीने वाले इन लोगों को अब खाद और बीज के लिए सहकारी समिति लिए कर्ज को चुकाने की चिंता सता रही है। आपको बता दें वन ग्राम मृगाडांड़ में पंडो किसानों को वन अधिकार पत्र मिला है उसी जमीन में उनके द्वारा धान की खेती कर्ज लेकर की गई, लेकिन अब धान बेचने पर संकट खड़ा हो गया है। ग्राम मृगाडांड़ के धरम साय पंडो, श्यामलाल पंडों, जवाहिर पंडो, संभल साय पंडो, अनिल पंडो रनसाय पंडो मानकुंवर पंडो के द्वारा धान की खेती के लिए कर्ज लिया गया है। इन 7 किसान पंडों किसान पंडों द्वारा कुल एक लाख आठ हजार सात सौ पैतीस रुपये कर्ज लिया गया है। वहीं इन किसानों के धान नहीं बिक पाने की वजह कर्ज पटाने में असमर्थ हैं। वे अब मजदूरी कर इसे पटाने की बात कह रहे हैं। पंडो किसानों का धान खरीदी नहीं किये जाने की बात को लेकर उदयपुर सहकारी समिति प्रबंधक ने बताया कि वन अधिकार पट्टा का रकबा ऑनलाइन नहीं होने की वजह से इन किसानों का धान पंजीयन खरीदी नहीं हो पा रहा है। इस कारण धान खरीदी नहीं किया जा रहा है।

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