नई दिल्ली- गैर भाजपा शासित राज्यों में राज्यपालों की राजनीतिक सक्रियता से बढ़ रहा टकराव कम से कम इस मुद्दे पर विपक्षी खेमे को एकजुट करता नजर आ रहा है। कांग्रेस-यूपीए के साथ विपक्षी खेमे में शामिल दल राज्यपालों की दखंलदाजी के खिलाफ लंबे समय से मुखर रहे हैं मगर अब तेलंगाना की सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति और दिल्ली में उपराज्यपाल से रोजाना रस्साकशी कर रही आम आदमी पार्टी ने भी इसमें अपना सुर मिला दिया है। तमिलनाडु में राज्यपाल एन रवि की द्रमुक सरकार के साथ ताजा टकराव ने विपक्ष को इस मामले में अब एकजुट होकर विरोध के सुर मजबूत करने को बाध्य कर दिया है।
द्रमुक के सांसद और नेता कर रहे हैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने की तैयारी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को गैर भाजपा शासित राज्यों में राज्यपालों के हस्तक्षेप पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक करार दिया। तमिलनाडु के राज्यपाल के विधानसभा में अभिभाषण का कुछ अंश नहीं पढ़ने के अभूतपूर्व कदम से बढ़े ताजा टकराव के बीच द्रमुक के सांसद और नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने की तैयारी कर रहे हैं।
वहीं विपक्षी खेमे के कई वरिष्ठ नेता केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, दिल्ली से लेकर झारखंड जैसे राज्यों में राज्यपालों की प्रदेश सरकार के साथ लंबे अर्से से चल रहे टकराव को देखते हुए इस मुद्दे पर एकजुट होकर केंद्र को घेरने के हिमायती हैं। लेकिन फिलहाल इसके लिए कोई उचित प्लेटफार्म का स्वरूप तय नहीं हो पाया है और ऐसे में राज्यपालों के जरिए संघीय व्यवस्था पर चोट पहुंचाने का मुद्दा विपक्ष संसद के बजट सत्र में ही उठा पाएगा।
राज्यपाल के मुद्दे पर कांग्रेस के समर्थन में उतरे आप और के चंद्रशेखर राव
आपसी राजनीतिक अंतर्विरोधों के बीच विपक्षी खेमे में इसको लेकर स्वर एक रहेगा इसकी पूरी गुंजाइश इसलिए भी है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और आम आदमी पार्टी दोनों राजभवनों के जरिए केंद्र के राज्यों के मामले में हस्तक्षेप के खिलाफ सियासी जंग के मैदान में उतर चुके हैं। अहम राजनीतिक मुद्दों पर सरकार की घेरेबंदी में कांग्रेस की अगुआई वाले विपक्षी खेमे की रणनीति से ये दोनों दल अक्सर दूरी रखते रहे हैं मगर इस मुद्दे पर विपक्ष की एकजुट ताकत की हिमायत करते नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तमिलनाडु के राज्यपाल को लेकर उठे ताजा विवाद पर टवीट करते हुए केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा शासित राज्यों में राज्यपालों के संवैधानिक कार्यालय को ‘कार्यकर्ता’ के रूप में इस्तेमाल कर उन्हें बदनाम करने के लिए भाजपा की सुविचारित योजना लोकतंत्र पर हमला है।
राज्यपालों को संविधान के ढांचे के भीतर काम करना होता है: खरगे
एन रवि के विधानसभा में अभिभाषण का हिस्सा पढ़ने से इनकार की ओर इशारा करते हुए खरगे ने कहा कि हाल ही में कुछ राज्यपालों ने निर्लज्जतापूर्वक संविधान का अतिक्रमण कर हमारी संघीय व्यवस्था के ढांचे को दूषित किया है। राज्यपालों को संविधान के ढांचे के भीतर काम करना होता है और वे उस विधानमंडल का अपमान नहीं कर सकते हैं जिसके वे अंग हैं। लेकिन उनके दिल्ली आकाओं द्वारा गैर भाजपा शासित राज्यों में सामाजिक और राजनीतिक अशांति पैदा करने के लिए हेरफेर किया जा रहा है जो खतरनाक है।
