यात्री परिवहन एवं ट्रंसपोर्ट उद्योग के विभिन्न वर्गों को अभी एक बहुत मुश्किल समस्या का
सामना करना पड़ रहा है, पिछले 7 महीनो से कोविड-19 वायरस के कारण किसी भी प्रकार का
व्यवसाय नही हुआ है और बैंक ई.एम.आई. के लिए बाध्य कर रही है। यात्री परिवहन सहित
अधिकांश सेवा उद्योग पिछले 7 महीनो से बंद एंव चलने में असमर्थ है।
जहां तक बैंक का सवाल है यह हमेशा की तरह व्यवसाय था, उन्हें वैश्र्विक महामारी की परवाह नही है, उन्हें नही लगता है कि इससे उनके व्यवसाय पर कोई फर्क पडना चाहिये,लेेकिन बैंको ने हमें महामारी से पहले की तरह ही व्याज दर पर रखा, ऋण पर व्याज जो हम पहले से भुगतान कर के
है, उन्होने ब्याज पर ब्याज वसूलने का फैसला किया। ये भारत सरकार का भी दायित्व है कि वे सामंजस्य करके इस
समस्या का निदान करें।
हमारा सवाल यह है कि बैंको को कब और कैसे लगता है कि हम कभी भी उन्हे दापस भुगतान
कर सकते है? संक्रमण कब सामाान्य होने जा रही है? लोग पूर्ण रूप से कोविड से निजात पायेंदो? बैंक
प्राचीन भारत के धन्ना सेटो की याद दिला रहे है, जिन्होने अपने ऋण में परिवारो की पीढ़ियो को
रखा और अंत मे उधारकर्ता इन उधारदाताओ के दास से अधिक नही थे।
हमारी मांग यह है कि मार्च 2021 तक ऋण स्थगन को बढ़ाया जाना चाहिए और इस विकट
अवधि के लिए कोई व्याज नहीं लिया जाना चाहिए। ऋण पुर्नगठन एक विकल्प नहीं है, क्योंकि किसी
को नहीं पता है कि महामारी कब खत्म होने वाली है।
कोविड-19 वायरस के कारण से विचलिलित सेक्टर बहुत दुरी तरह प्रभावित हुए:-

  1. अंर्तराज्यीय बसे
    अंर्तराज्यीय मार्गो मे बसो का संचालन अभी भी 5 प्रतिशत ही है क्योकि काम या शिक्षा के
    लिए कोई भी यात्रा नहीं करता है। लोगो में अभी भी कोरोना वायरस का भय है जिसके
    कारण से वे परी से नहीं निकल नही रहे है।
  2. सिटी बसे
    लोक परिवहन सेवा के लिए संचालित सिटी बस जिसे अधिकांश शहरी व ग्रामीण स्तर के लोग परिवहन के लिए चुनते है इसमें भी अब कोई वायरस के भय से घरों से नहीं निकल रहे हैं।
  3. निजी टैक्सी
    सभी मिटिंग आदि जूम/विडियो कॉल पर की जा रही। अधिकांश कंपनियो ने अपने
    कर्मचारियो को घर से काम करने के लिए कहा है, तो अब निजी टैक्सी किराए पर लेने की
    जरूरत नहीं है।
  4. आटो
    सार्वजनिक परिवहन के किसी अन्य रूप की तरह ही लोग इसका इस्तेमाल करने से हिचकते
    है। वे अपने परिवार के लिए भोजन नहीं ला पा रहे है लेकिन बैंक को ई.एम.आई. देने के
    लिए बाध्य है।
    5. ट्रक
    ज्यादातर बेकार पडे प्लांटो मे 40 प्रतिशत बेडा या तो उत्पादन बंद है या उत्पादन में कटौती
    हुई है। ई.एम.आई. का भुगतान करने के लिए पर्याप्त लाभ कमाने के लिए ईंधन की बस्ती
    लागत भी उनके लिए ज्यादा जगह नहीं छोडती है। वे परिवहन लागत को बढाने के बारे मे
    सोच भी नहीं सकते क्योकि यहां तक वे जिन कंपनियो के लिए सेवा प्रदान कर रहे है वे
    मंदी का सामना कर रहें है और आपूर्ति मांग की तुलना ने बहुत अधिक है।
  5. स्कूल बसें
    सबसे खराब हिट क्षेत्रो मे से एक है और शायद यह ठीक होने वाले अंतिम लोगो मे से एक
    होने जा रहा है। जल्द ही कभी खुलने की उम्मीद के विना मार्च के बाद से स्कूल बंद हो
    गए है। अधिकांश स्कूलो ने ऑनलाईन कक्षाएं शुरू कर दी है और वे ट्यूशन फीस भी जमा
    कर रहे है। लेकिन कोई भी परिवहन सेवाओ के लिए भुगतान करने के लिए तैयार नही है
    क्योंकि वे इसका उपयोग नहीं कर रहे है। भले ही परिवहन स्कूल के बुनियादी ढांचे का एक
    अभिन्न हिस्सा है, यहां तक कि अदालतो ने भी यह फैसला किया है कि छात्रो से कोई
    परिवहन शुल्क नहीं लिया जाता है। इसके परिणाम रूवरूप सभी स्कूल बस कर्मचारी अपनी
    नौकरी खो देते है और मालिको के लिए अपने बैंक ऋणो की सेवा के लिए कोई रास्ता नही
    है। सरकार को स्कूल बसो के लिए एक विशेष पैकेज के साथ आना होगा।
  6. टयूरिस्ट बस सेवा
    कोविड-19 वायरस के कारण से अवाजाही बंद है जिससे ट्यूरिस्ट बस सेवा भी आर्थिक तंगी
    की मार झेल रहा है।
    अगर बैंक बहुत जल्द इन कर्ज लेने वालो पर व्याज लेने और पैसा बनाने पर जोर देते
    है तो स्थिति बहुत विकट निर्मित होगी। कर्जदारो के पास अपने वाहनो को सरेन्डर करने के
    अलावा कोई विकल्प नही होगा। अराजकता की स्थिति निर्मित होगी। क्या हर ट्रांसपोर्टर एक
    ही जैसे समस्या से नही गुजर रहा है? राज्य सरकार ने यहां के ट्रांसपोर्टरो के लिए बहुत कुछ
    किया है राज्य सरकार ने यहां के ट्रांसपोर्टो के लिए बहुत कुछ
  7. किया है जैसे टैक्स में छूट, वाहन रिलिज ,एवं यात्री किराया पर विचार। केंद्र सरकार के लिए
    भी इस उद्योग की मदद के लिए कुछ ठोस कदम उठाने का समय आ गया है, जब दुनिया
    मे कोई भी पिछले 7 महीनो से कोई व्यवसाय नही कर पाया तो बैंक को इरा अनुचित लाभ
    को लेने की अनुमति क्यो दी गई है।
    हमे उम्मीद है कि 28 सितम्बर को जब सर्वोच्च न्यायालय ने अखिरकार इस मामले
    पर फैसला किया जायेगा तो वे लोगो को कुछ राहत देंगे। 28 सितम्बर को होने वाल फैसला हर व्यक्ति को प्रभवित करेगा ना की सिर्फ ट्रांसपोर्टरों को। ऋण स्थगन दोपहिया करो घरों टीवी फोन फर्नीचर इत्यादि के लिए है यह आपको और मुझे और सभी को एक या दूसरे तरीके से प्रभावित करेगा।

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