अंबिकापुर – कलम की सुगंध छंंदशाला के तत्वावधान में श्रम दिवस के अवसर पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया

इस कार्यक्रम में संस्थापक संजय कौशिक विज्ञात,अध्यक्ष राजकुमार धर द्विवेदी विशिष्ट अतिथि बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ ‘मुख्य अतिथि बोधन राम निषाद राज ‘विनायक’ पटल संचालक इंद्राणी साहू , कवि साखी गोपाल पांडा , श्रीमती नीतू ठाकुर विदुषी , श्रीमती चमेली कुर्रे की उपस्थिति में आयोजन किया गया ।

कार्यक्रम की शुरुआत में अनिता मंदिलवार सपना ने सरस्वती वंदना से की गई । भारत के अनेक जगहों से रचनाकारों ने प्रतिभागिता की और कुल 43 सदस्यों ने ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से सस्वर काव्य पाठ कर ऐसा माहौल बना दिया जैसे सभी एक दुसरे से रूबरू हो कर काव्य पाठ का आनंद ले रहे हैं . रचनाएँ श्रम को सम्मान देती हुई केन्द्रित रही एवं एक से बढ़ कर एक गीत , ग़ज़ल , दोहे , मुक्तकों ,मुक्तछंद रचनाओं से युक्त काव्य पाठ ने ऑनलाइन गोष्ठी को यादगार बना दिया ..सभी रचनाकारों ने एक दुसरे की रचनाओं को सुना और जी भर के प्रशंसा कर एक दुसरे की हौसला अफजाई की .

काव्य पाठ में संजय कौशिक विज्ञात ने कुण्डलिया प्रस्तुत की- मजदूरी का काम क्या, छोड़ बाल श्रम आज, वीरेन्द्र सिंह चौहान ने तोड़ तभ की कमर आ गए मित्रवत, राजकुमार धर द्विवेदी ने अब वहाँ महल है, झोपड़ी नहीं, बोधन राम निषादराज”विनायक ने अनिता मंदिलवार सपना अंबिकापुर ने मजदूर हूँ पर क्यों सबसे दूर हूँ अर्चना पाठक, अम्बिकापुर ने तपती रेत में पाँव जले हैं, चमेली कुर्रे ‘सुवासिता’ ने अपनी मेहनत से कभी जी न चुराया हमनें, धनेश्वरी देवाँगन धरा रायगढ़ श्रमिक पीर तो कोई पढ़ लो, मयंक मणि दुबे, बिलासपुर गर श्रम का महत्व तुम जानो सोचो, डॉ श्रीमती कमल वर्मा, श्रम है धरती की धुरी ने बहुत वाहवाही बटोरी ।

ऑनलाइन कवि सम्मेलन में रुपेश कुमार, गीतांजलि, केवरा यदु”मीरा”, राधा तिवारी”राधेगोपाल” उत्तराखंड धनेश्वरी सोनी गुल,आरती श्रीवास्तव, संगीता राजपूत’ श्यामा ‘,महेन्द्र देवांगन माटी पंडरिया, , तेरस कैवर्त्य’आंसू बलौदाबाजार
अटल राम चतुर्वेदी, कुंवर बेचैंन सदाबहार, रवि रश्मि ‘अनुभूति ‘ , मुंबई, कुन्दन कुमार, सहित अन्य प्रतिभागी सदस्यों ने भी भाग लिया जिसमे सबकी प्रस्तुति बेहतरीन रही । काव्य सम्मेलन का संचालन अनिता मंदिलवार सपना और अर्चना पाठक निरन्तर ने किया ।

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