अंबिकापुर ! शहर की समाज सेविका श्रीमती ममोल कोचेटा ने विश्व महिला दिवस पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस याद दिलाता है कि सृजन की क्षमता रखने वाली महिला सबसे बड़ी शक्ति है ।अपने अस्तित्व को विस्तार देती हुई अपनी शक्ति का नियोजन की है।हर भूमिका में खरी उतरने महिला में धैर्य है जोश है शक्तिशाली है। आज महिला दिवस पर मै अपने विचार रखती हुई कहती हूं मै एक स्त्री के रूप में जन्म लेकर महत्वपूर्ण हूं।अपने लिए तो सभी जीते है पर स्त्री अपने जन्म के रिश्तों को छोड़कर उस परिवार को अपनाती है जो उसके लिए अनजान होता है जन्म का परिवार पराया हो जाता है।यही सीख देता है त्याग का।

एक महिला खुशियों की अनूठी माला होती है। जब वो हृदय से आनंदित होती है तब तब घर आंगन में इन्द्र धनुषी रंगो की रंगोली सजती है ।रिश्तों की मधुर संगीत तान सुनाई देता है।
मै कहूंगी एक स्त्री का अध्याय साहस और धैर्य का वो अध्याय है जो पतझड़ में भी बसंत सजाता है।

अपनी विरासत सत्यम शिवम सुंदरम की त्रिवेणी को सहेजकर विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है।
ममता की मंदाकिनी ,सदाचार की संरक्षिका, ज्ञान की वेदी,त्याग समर्पण ,तप की त्रिवेणी है।महिला ने दम खम नम जैसे स्वर्णिम सूत्रों से परिवार राष्ट्र और समाज के एकीकरण में भूमिका निभाई है।
रोटी बनाने में पारंगत है तो रोटी कमाने में भी पारंगत है
कृतृत्व का जौहर दिखाने में अग्रणी हर महिला को शुभ कामना मंगल कामना।
अपने प्रति मंगल भाव रखती हूं मेरा चिंतन मौलिक बना रहे ।

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