सरकारी आयोजन में अधिकारियों ने करा दिया था हिन्दू युवती का निकाह

रामानुजनगर। विगत 13 मार्च को शासकीय सामूहिक कन्यादान योजना के तहत हुए विवाह समारोह में एक हिन्दू युवती का बगैर उसके माता पिता का सहमति लिए एक मुस्लिम युवक से निकाह करा दिए जाने के बाद मचे बवाल के बीच शासन द्वारा 4 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। रविवार को उक्त जांच टीम युवती के गांव बरबसपुर पहुंची है।जांच समिति में रामानुजनगर एसडीएम उत्तम कुमार रजक, प्रतापपुर एसडीएम दिपिका नेताम, सहायक आयुक्त विश्वनाथ रेड्डी तथा पंचायत निरीक्षक नर्मदा सिंह शामिल हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत यहां ग्राम पटना में महिला बाल विकास विभाग द्वारा सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया था। जिसमें 84 जोड़ों का विवाह कराया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक सहित तमाम जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। किंतु कार्यक्रम के एक दिन बाद उस समय बवाल मच गया जब पता चला कि महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने एक हिन्दू युवती का मुस्लिम युवक से निकाह करा दिया। हालांकि युवती युवक दोनों के बीच आपसी सहमति थी। मगर सरकारी नियमानुसार युवक युवती के रजामंदी से अधिक उनके माता पिता की सहमति महत्वपूर्ण व आवश्यक होता है। इस मामले में युवती के परिजन शपथ पत्र के साथ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर मामले की शिकायत कर बताया कि युवती को अधिकारियों ने बहला फुसलाकर मुस्लिम युवक से मुस्लिम रिति रिवाज के अनुसार निकाह करा दिया जिससे परिवार व पूरा समाज आहत है। और इसे लव जिहाद का मामला बताया है। इधर दूसरी ओर मामले में विपक्षी दलों के नेता व समाज के लोग भी सक्रिय हो गए और इस मुद्दे को विधानसभा तक ले जाने की तैयारी में जुट गए हैं। जैसे ही यह खबर मिडिया की सुर्खियों में आया तो अब विभागीय अधिकारी मामले की लीपापोती में जुटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि रविवार को जांच दल गांव पहुंचता उससे पहले ही विभागीय अधिकारी युवती के माता पिता से दबावपूर्वक एक सादे पेपर पर अंगूठा लगवा लिए। युवती के परिजन जांच दल के सामने अंगूठे में लगे स्याही को दिखाते हुए इस बात की जानकारी दी है। मामले को बढता देख विभागीय अधिकारी सकते में आ गए हैं। जांच टीम पूरे मामले की पड़ताल करेगी और रिपोर्ट शासन को देगी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत होने वाले विवाह के पंजीयन में लड़का लड़की के सहमति से ज्यादा महत्वपूर्ण परिजनों की सहमती आवश्यक होता है। इस मामले में कहीं न कहीं अधिकारियों ने बड़ी चुक परिलक्षित हो रही है ।


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