बिश्रामपुर। शासकीय महाविद्यालय बिश्रामपुर में मंगलवार को जनजाति समाज का गौरवशाली अतीत ऐतिहासिक सामाजिक व आध्यात्मिक योगदान का एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया।महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा मांदर के थाप के साथ कर्मा नृत्य करते हुए अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बतौर अतिथि रितेश जायसवाल जन भागीदारी अध्यक्ष शासकीय महाविद्यालय बिश्रामपुर, मुख्य वक्ता संत सिंह जिला संयोजक जनजाति गौरव समाज सूरजपुर अन्य वक्ता शिव सिंह जनजाति गौरव समाज सूरजपुर उपस्थित थे।स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य डीपी कोरी ने कहा कि जनजाति समाज प्रकृति पुत्र हैं। जल, जंगल और जमीन के प्रति उनके लगाव से उन्हें प्रकृति पुत्र की संज्ञा मिली है।अंग्रेजों से देश को आजाद कराने में भी जनजाति समाज का गौरवशाली इतिहास है, जिसे सभी छात्र-छात्राओं को स्मरण करते रहना चाहिए। जनजाति समाज के बलिदान पर छत्तीसगढ़ी में उन्होंने मंच से कविता भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं द्वारा छत्तीसगढ़ के लोकगीत कर्मा और सुआ नृत्य प्रस्तुत किया गया।मनीषा अंजलि तिर्की द्वारा जनजाति समाज के ऐतिहासिक सामाजिक विषय पर अपना विचार प्रस्तुत किया गया। मुख्य वक्ता संत सिंह ने जनजाति समाज के वीर पुरुषों को याद कर छात्र-छात्राओं को उनके बलिदान को बताया।उन्होंने कहा कि जनजाति समाज मेहनती और परिश्रमी होते हैं, वे भीख नहीं मांगते और समाज उत्थान के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। अन्य वक्ता शिव सिंह ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा शहीद गुंडाधुर शहीद वीर नारायण सिंह नागुल दौरला अनेक ऐसे जनजाति समाज से बलिदानी हुए हैं, जिन्हें आज के युवा पीढ़ी को हमेशा उनके बलिदान को याद रखना चाहिए। रितेश जायसवाल ने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रपति एवं मुख्यमंत्री जनजाति समाज से हैं। जनजाति समाज ने सदैव प्रकृति की रक्षा की है और उन्हीं का अनुशरण करते हुए आज के युवा को उनके पद चिन्ह पर चलना चाहिए। महाविद्यालय में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त देश के जनजाति समाज के झांकी की प्रदर्शनी लगाई गई थी। इस अवसर पर रंगोली, मेहंदी एवं निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

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