बहन को जमीन पर गिरे भाई ने देखा और खेत में काम कर रहे माता-पिता को जानकारी दी


क्षेत्रीय अस्पताल से मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर तक दौड़ लगाई, हुई मौत  


गिरजा ठाकुर


अंबिकापुर। बच्चे खेल-खेल में क्या कदम उठा बैठेंगे कहना मुश्किल रहता है। स्वजनों के ध्यान नहीं देने से कभी-कभी हालात विकराल रूप ले लेते हंै। ऐसे ही एक मामले में मासूम बच्ची दम तोड़ दी, जिससे मातमी विलाप के हालात परिवार में बन गए। घटना रामानुजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम परशुरामपुर की है। स्वजनों ने बच्चों के खेलने के लिए साड़ी का झूला बनाकर कंडी के सहारे टांगा था। मंगलवार को 12 वर्षीय बच्ची के लिए यही झूला खेलते-खेलते मौत का झूला बन गया। बच्ची को नहीं मालूम था कि जिस साड़ी के झूले में वह खेल रही है, वह उसके लिए मौत का फंदा साबित होगा। स्वजन बच्ची को लेकर तीन अस्पताल तक दौड़ लगाते रह गए, लेकिन उसकी मौत हो गई।
ऐसे दर्दनाक परिदृश्य का सामना 14 मार्च को सूरजपुर जिले के रामानुजनगर थाना अंतर्गत ग्राम परशुरामपुर निवासी कृषक सुखदेव सिंह व उसके स्वजनों को करना पड़ा। 12 वर्षीय रितिका घर में कंडी से लटके साड़ी के झूले में झूल रही थी। परिवार के अन्य सदस्य अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। अचानक झूला झूलते चहक रही बच्ची के गले में साड़ी का फंदा कस गया, जिससे वो अचेत होकर गिर गई। रितिका का भाई जब बाहर निकला तो वह बहन को जमीन में अचेत पड़े देखा, उसके गले में साड़ी, मौत का फंदा बनकर लिपटा था। इसकी जानकारी वह खेत में काम करने के लिए माता-पिता को दिया, तो वे दौड़ते-भागते घर पहुंचे। बच्ची की हालत देख आनन-फानन में बच्ची को रामानुजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, यहां से प्राथमिक जांच, उपचार के बाद बच्ची को सूरजपुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, यहां से भी उसे रेफर कर दिया गया। बच्ची को स्थिति को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर का रास्ता दिखा दिया गया, यहां आते तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। आपातकालीन चिकित्सा केंद्र के डॉक्टर ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया। घर में खेलते चहक रही बच्ची की असमय मौत से मातम का माहौल बन गया। पुलिस ने स्वजनों का बयान लेकर बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराया है।  

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