वेद प्रकाश मिश्र

बिश्रामपुर। फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति वर्ग की जमीन खरीद उनके गोद पुत्र बन वर्षों से एसईसीएल में नौकरी कर रहे दर्जन भर से अधिक कर्मचारियों में से पांच कोलकर्मियों को बिश्रामपुर एसईसीएल प्रबंधन ने जांच उपरांत सेवा से बर्खास्त कर दिया है। सेवा से बर्खास्त किए गए कर्मियों में राधेश्याम पिता दयाराम शूट ऑपरेटर रेहर खदान, राजाराम पिता महाबीर इलेक्ट्रिकल फिटर गायत्री खदान, श्रवण कुमार पिता धर्मदेव इलेक्ट्रिकल फिटर गायत्री खदान, रामविलास पिता विक्रम पम्प ऑपरेटर कुमदा 7/8 खदान, बिजेंद्रनाथ पिता जयराम ब्लाटिंग क्रूमैन कुमदा 7/8 खदान के नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इसी प्रकरण में इसके पूर्व वर्ष 2016 में अनुसूचित जाति वर्ग का जमीन क्रय कर उसका गोद पुत्र बन नौकरी कर रहे बिश्रामपुर निवासी साहेब पिता रामनगीना को जो बिश्रामपुर से स्थानांतरित हो सेंट्रल वर्कशॉप कोरबा में नौकरी कर रहे थे, उसे वर्कशॉप प्रबंधन कोरबा ने सेवा से बर्खास्त कर दिया था, तब से संबंधितों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई थी। जिन पांच लोगों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, वे लोग सन 1994-95 से कंपनी में नौकरी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि दर्जन भर से अधिक ऐसे फर्जी नौकरी करने वालों की शिकायत कंपनी के समक्ष गोपनीय शिकायत पत्र के माध्यम से वर्षों पूर्व की गई थी। कंपनी द्वारा कराए गए विभागीय जांच में मामला सही पाए जाने के बाद कार्रवाई से बचने संबंधित लोगों द्वारा मामले को उच्च न्यायालय ले जाया गया, यहां भी उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलने के बाद संबंधित लोगों ने बीएमएस यूनियन के माध्यम से प्रकरण को रीजनल लेबर कमिश्नर के यहां ले जाया गया, यहां भी लंबे समय तक केस को लटका के रखने के खिलाफ कॉलरी प्रबंधन ने पुनः उच्च न्यायालय का रुख किया। जिसके बाद पिछले दिनों उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रबंधन ने पांच कर्मियों को कंपनी की सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया है। दीपावली के ठीक पहले क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा बर्खास्तगी आदेश जारी करने से हड़कंप मच गया है। ज्ञात हो कि एसईसीएल बिश्रामपुर व भटगांव क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों मामले हैं। जिसमें कूटरचित दस्तावेजों के जरिए अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग की जमीन खरीद फर्जी तरीके से वसीयतनामा तैयार कर अथवा गोदपुत्र बन कंपनी में लोग नौकरी कर रहे हैं। कई बार ऐसे मामलों में राज्य सरकार अथवा न्यायालय द्वारा जांच के आदेश देकर फर्जी लोगों को सेवा से बर्खास्त करने प्रबंधन को निर्देशित किया है, लेकिन प्रबंधन यूनियनों के रौबदार नेताओं से संबंध खराब होने से ऐसे मामलों से हांथ डालने से अब तक बचता रहा है। कोर्ट ने फैसले में लिखा है कि यह रिपोर्ट प्राप्त हुई है कि ग्राम करमपुर स्थित भूमि खसरा क्रमांक 358/12 घ, रकबा 0.405 हेक्टेयर भूमि का एसईसीएल द्वारा अधिग्रहण किए जाने पर आप भूमि स्वामी मनियारो पिता लाखन उरांव का नाती बनकर सहमति पत्र, शपथ पत्र एवं वंशबृक्ष इत्यादि के आधार पर एसईसीएल में रोजगार प्राप्त किए हैं, जबकि एक शिकायत पत्र के अनुसार आपकी जाति अहिर यादव बताई गई है। साथ ही सेवा पुस्तिका में आपके द्वारा की गई घोषणा अथवा आपके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज में आपकी जाति अहीर यादव दर्शाई गई है। इस प्रकार आदिवासी पिता लखन जाति उरांव का नाती आप (गैर आदिवासी) कैसे हो सकते हैं। निश्चय ही नौकरी पाने के उद्देश्य से आपके द्वारा फर्जी तरीके से झूठा दस्तावेज तैयार करते हुए फर्जी नाती बनकर एसईसीएल के साथ धोखाधड़ी करते हुए नौकरी हासिल की गई है।

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