वेद मिश्रा

बिश्रामपुर। लड़का की चाहत पूर्ण न होने से क्षुब्ध 15 दिन की मासूम बच्ची की कुंए में डालकर हत्या करने वाली कलयुगी दादी को पुलिस ने गिरफ्तार कर अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझा ली है। पुलिस द्वारा आरोपी दादी को न्यायालय पेश कर जेल दाखिल करा दिया है। करंजी पुलिस ने बताया कि गतदिनों 1 अप्रैल को ग्राम पंचायत करंजी निवासी प्रार्थी पंकज विश्वास ने रिपोर्ट दर्ज कराया था कि सुबह काम करने प्रार्थी राईस मिल गया था। घर में पत्नी, बहु के अलावे 15 दिन की मासूम  नतनीन घर में थे और दूसरे घर में मां, भाई, बहु थे। शाम को मोबाईल के माध्यम से जानकारी मिला कि 15 दिन की मासूम नतनीन अपने मां के साथ सोई थी, जिसे कोई अज्ञात व्यक्ति उठाकर ले गया है। सूचना पर प्रार्थी घर पहुंचा तब वहां भीड़ लगा था। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण साहू ने चौकी करंजी पुलिस सहित पुलिस अधिकारियों को मौके पर भेजते हुए घटना स्थल का बारीकी से मुआयना कर नवजाव बच्ची की खोजबीन करने तथा बच्ची को उठाकर ले जाने के मद्देनजर पूरे जिले की पुलिस को एलर्ट कर घेराबंदी करने के निर्देश दिए थे। मौके पर पहुंची पुलिस द्वारा नवजात शिशु का खोजबीन करने के दौरान उसके ही बाड़ी में स्थित कुंए में झगर डालकर देखा गया तो नवजात बच्ची कपड़ा में फंसकर कुंए के पानी के उपर निकली थी, जिसकी मृत्यु हो चुकी थी। अज्ञात व्यक्ति द्वारा नवजात शिशु को बिस्तर से उठाकर हत्या करने के नियत से कुंए के पानी में फेंक देने की सूचना पर मर्ग कायम उपरान्त धारा 302, 20 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया था।एएसपी मधुलिका सिंह व सीएसपी जेपी भारतेन्दु के मार्गदर्शन में करंजी पुलिस द्वारा विवेचना की गई। पूछताछ में नवजात बच्ची की मां ने बताया कि जब वह नवजात बच्ची के साथ सो रही थी, तब उसकी सास आरोपी मिताली विश्वास उसके बच्ची को उठाकर ले गई थी। जब बच्ची की मां सोकर उठी तो सास से बच्चे के बारे में पूछा तो वह बोली कि बच्ची को नहीं लाई है। संदेह के आधार पर पुलिस ने मिताली से कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने बताया कि लड़की पैदा हुई थी, इसी कारण आरोपी दादी ने नवजात बच्ची को उठाकर ले गई और कुंए में फेंक दी थी। मामले में आरोपी दादी 48 वर्षीय मिताली विश्वास निवासी ग्राम पंचायत करंजी के विरूद्ध सबूत पाए जाने पर उसे गिरफ्तार कर आज न्यायालय पेश कर दिया है। कार्रवाई में करंजी चौकी प्रभारी संजय गोस्वामी, एएसआई मनोज द्विवेदी, गुड्डु कुशवाहा, प्रधान आरक्षक उमाशंकर कुशवाहा, आरक्षक मितेश मिश्रा, सत्य नारायण सिंह, महिला आरक्षक अनिता राजवाड़े व सैनिक साहेब गनी सक्रिय रहे।

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