रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- वार्ड क्रमांक 13 निवासी दौलतराम कश्यप का दोनों पैरों से दिव्यांग पुत्र विष्णु कश्यप उम्र 23 वर्ष मामूली बुखार होने के बाद निजी चिकित्सक से इलाज कराने के बाद विष्णु की स्थिति बिगड़ गई जिसके बाद उसे अंबिकापुर मिशन अस्पताल भर्ती किया गया वहां भी स्थिति नहीं सुधरी तो रायपुर हॉस्पिटल में इलाज चला जहां डॉक्टरों के द्वारा बताया गया कि दोनों  किडनी फेल हो चुका है परंतु आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय होने के कारण विष्णु का डायलिसिस नहीं हो पा रहा है। परिवार प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से से मदद की गुहार लगा रहा है।

                                           प्राप्त जानकारी के अनुसार विष्णु 14 फरवरी को हल्का बुखार था जिसके बाद उसका इलाज स्थानीय निजी चिकित्सक के द्वारा किया गया। उनके परिजनों ने बताया कि विष्णु को निजी चिकित्सक के द्वारा दवाइयां दी गई एवं तीन इंजेक्शन लगाया गया जिसके बाद विष्णु की स्थिति एकाएक बिगड़ने लगी जिसके बाद आनन-फानन में तत्काल विष्णु को मिशन अस्पताल अंबिकापुर ले जाया गया वहां डॉक्टरों ने बताया कि जो प्रारंभिक इलाज चला उसमें ज्यादा डोज का दवाई देने का ऐसा हुआ। जिसके बाद मिशन अस्पताल अंबिकापुर में चार दिनों तक इलाज चलने के बाद रायपुर के लिए रेफर कर दिया गया जिसके बाद विष्णु को डीकेएस अस्पताल रायपुर भर्ती किया गया वहां डॉक्टरों ने किडनी में इन्फेक्शन होना बताया वह 15 दिन की दवाई दी।

लॉकडाउन के कारण समय पर नहीं मिल पाया दवा- विष्णु को डीकेएस अस्पताल रायपुर के डॉक्टरों के द्वारा 15 दिन की दवाई दी गई थी 15 दिन का दवाई लेने के बाद विष्णु की स्थिति काफी अच्छी होने लगी थी डॉक्टरों ने दवाई को 3 माह तक लगातार खाने को कहा था परंतु इस बीच लॉकडाउन हो जाने के कारण दवा समय पर नहीं आ पाया एवं 15 दिनों तक बिना दवा के ही रहा जिससे स्थिति उसकी और बिगड़ने लगी तो आनन-फानन में नगर पंचायत अध्यक्ष रमन अग्रवाल के मदद से पुनः रायपुर डीकेएस हॉस्पिटल में भेजा गया परंतु डॉक्टरों के द्वारा दोनों किडनी फेल होने की बात कही गई। 

विकलांगता को मात देता था विष्णु- दोनों पैरों से विकलांग होने के बाद भी विष्णु कभी अपने घर वालों को एहसास नहीं होने दिया कि वह विकलांग है प्रतिदिन व अपने पिता के साथ ठेला निकालता था यहां तक कि गढ़वा डालटेनगंज रांची तक माल लेने खुद ही जाता था।

आर्थिक तंगी के कारण नहीं करा पा रहे है डायलिसिस- विष्णु के परिवार जनों की स्थिति ऐसी नहीं है कि विष्णु का एक बार भी डायलिसिस करा सके क्योंकि बीते 3 माह में इतने पैसे खर्च हो गए हैं कि अब घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है। पूरा परिवार कर्ज में तो डूबा है दैनिक खर्च भी करना मुश्किल हो रहा है ऐसे में पूरे परिवार को जनप्रतिनिधियों एवं शासन से मदद की आस है।

यदि मदद होती है तो बच सकती है जिंदगी- तत्काल विष्णु की आर्थिक मदद जनप्रतिनिधि या शासन की ओर से होता है तो विष्णु की जिंदगी बच सकती है। विष्णु के परिवार वाले तो अब धीरे-धीरे आस भी छोड़ते जा रहे हैं।

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