बिहारपुर( मुकेश साकेत)- चांदनी क्षेत्र के कई गांव के ग्रामीण सडक, पानी, बिजली, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते ग्रामीण पहाड़ व जंगल के पथरीले रास्तों को पार कर तीन से चार किलोमीटर दूर जाकर मौरी नाले से पानी जुटा रहे हैं। ओड़गी विकासखंड अंतर्गत भुण्डा गांव के ग्रामीणों को पानी लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। जरूरतों को पूरा करने के लिए लोगों को पहाड़ से नीचे उतरकर जाना पड़ता है। जहां से वह बर्तनों में पानी भरकर दुर्गम रास्ते को पार कर अपने घर पहुंचते हैं।

पानी के इंतजाम के लिए लोग सुबह से ही मौरी नाले तक पहुंच जाते हैं। वहीं शाम को भी महिलाएं, बच्चे व पुरुष पानी के इंतजाम के लिए पहुंच जाते हैं। इस दौरान लोगों की कोशिश रहती है कि पानी से संबंधित अधिकांश काम नाले पर ही पूरे कर लिए जाएं, ताकि ज्यादा पानी का इंतजाम घर में नहीं करना पड़े। नवभारत समाचार पत्रों में छपने के बाद मई 2019 में पहुंच विहीन क्षेत्र होने के कारण यहां पीएचई विभाग ने कोरिया जिले के सोनहत के रास्ते मशीन भेजकर खनन करवाया था। इस दौरान भुण्डा में चार जगहों पर खनन का कार्य किया गया, लेकिन वहां का जलस्तर 200 फीट के नीचे मिला। इस कारण वहां विभाग ने हैंडपंप नहीं लगाया।

इस पर विभाग ने खनन वाले स्थानों पर सोलर पावर वाटर पंप लगाकर पानी का इंतजाम करने का आश्वासन दिया। यह प्रस्ताव कागजों तक ही सीमित रह गया और अधिकारी भूल गए। यही कारण है कि आश्वासन के 11 महीने का समय बीत जाने के बाद भी यहां के ग्रामीणों की दिनचर्या नहीं बदली। पानी के लिए किए जाएंगे प्रयास: विधायक राजवाड़े- भटगांव विधायक पारस नाथ राजवाड़े ने बताया कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ठीक न होने के कारण समस्याएं हो रही हैं, अधिकारियों से बात हुई थी तो उन्होंने बताया था कि पानी का इंतजाम कर दिया गया है। लेकिन अब तक पानी का इंतजाम नहीं किया गया, ये मेरी जानकारी में नहीं है। यदि इंतजाम नहीं हुआ है तो इस संबंध में बात कर वहां पेयजल का इंतजाम करने के लिए प्रयास करेंगे।

सोलर पावर पंप की नहीं मिली स्वीकृति: यस.बी सिंह पीएचई- लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता एसबी सिंह ने बताया कि उस गांव मे 4 जगहों पर खनन किया गया है। जिसमें वहां का जल स्तर 200 फीट के नीचे मिला। इस कारण हैंडपंप नहीं लगाए जा सकते हैं। गांव में विद्युत विस्तार नहीं होने के कारण पेयजल व्यवस्था के लिए विभाग ने सोलर पावर पंप लगाने का प्रस्ताव दिया है। फरवरी में प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली।

जंगली जानवरों को बना रहता है खतरा- ग्राम पंचायत खोहिर के पूर्व सरपंच तेजबली सहित वर्तमान सरपंच फूलसाय पण्डो ने बताया कि सुबह होने के साथ ही गांव की महिलाएं सिर पर बर्तन रखकर और पुरुष कांवड़ लेकर मौरी नाले तक पहुंचते हैं। वहीं छोटे-छोटे बच्चे भी पहाड़ जंगल के रास्ते पेयजल लेने जाते हैं। वही एक मात्र स्थान है जहां पर पानी उपलब्ध रहता है। जहां पर ग्रामीण नहाने, बर्तन धोने का काम निपटाने के बाद पेयजल के लिए पानी लाते हैं। यहां तक कि इसी नाले से जंगली जानवर भी अपनी प्यास बुझाते हैं। इससे लोगों को जानवरों को भी भय बना रहता है। इस कारण लोग समूह बनाकर पानी भरने के लिए पहुंचते हैं।

उर्मिला चेरवा ने बताया कि कोशिश रहती है कि अधिकांश काम को नाले पर ही पूरा कर लिया जाए, ताकि घर पर ज्यादा पानी न ले जाना पड़े। गांव में चार बार हैंडपंप खनन के लिए हो चुका प्रयास, लेकिन सक्सेज नहीं हुआ, नाले पर पहुंचकर ही लोग अपने दैनिक कार्य करते हैं। नाले से इस तरह से सामूहिक रूप से पानी भरती हैं महिलाएं। पानी के लिए इस तरह से बच्चे और बड़े एक साथ बर्तन लेकर जाते हैं।

Categorized in: