अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में जटिल ऑपरेशन कर मरीजों की जान बचाने का सिलसिला अनवरत जारी है। प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मंत्री टीएस सिंहदेव की मंशा के अनुरूप कोशिश की जा रही है कि मरीजों को कहीं और रेफर करने की नौबत न बने। इसके लिए अस्पताल अधीक्षक ने संबंधित चिकित्सकों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जरूरत पडऩे पर ही किसी मरीज को बाहर रेफर किया जाए।
जानकारी के मुताबिक अंबिकापुर के ब्रह्म रोड निवासी अजय गुप्ता 53 वर्ष को पिछले एक वर्ष से जीभ में छाला था, जो वृहद रूप ले लिया। इससे उन्हें काफी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा था। परेशानी बढऩे पर वे राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला अस्पताल के दंत रोग विभाग में चिकित्सक से संपर्क किए। चिकित्सक ने जीभ में घाव का रुप लिए छाले के हिस्से को काटकर उसका सैंपल जांच कराया। जांच रिपोर्ट कैंसर पॉजिटिव मिलने पर डॉ.अभिषेक हरीश ने स्वजनों को बताया कि सर्जरी कर कैंसर के फैलाव को रोका जा सकता है। ऐसे में जीभ में जिस हिस्से तक कैंसर फैल चुका है, उसे काटने की नौबत बन सकती है। स्वजन सर्जरी के लिए राजी हुए तो उन्होंने इसकी जानकारी मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ.रमनेश मूर्ति और अस्पताल अधीक्षक डॉ.लखन सिंह को दी थी। सर्जरी के पहले कुछ जरूरी सामानों की आवश्यकता थी, इस कमी को अस्पताल प्रबंधन ने दूर किया और पीडि़त की सर्जरी की गई। सर्जरी के दौरान गले तक जीभ के जुड़े हिस्से की सफाई के लिए चीर-फाड़ करना पड़ा। चार घंटे तक चली शल्य क्रिया के दौरान पीडि़त का आधा जीभ काटकर चिकित्सक को निकालना पड़ा ताकि कैंसर का प्रभाव गले की ओर न बढऩे पाए।
काफी राहत मिली पीडि़त को-
ऑपरेशन किए चिकित्सक ने चर्चा के दौरान बताया कि जीभ में हुए कैंसर की पहली सर्जरी इस अस्पताल में सेवा देने के दौरान उन्होंने की है। पहले यह जानना जरूरी था कि जीभ में जो घाव बड़ा रूप ले चुका है, वह वास्तव में क्या है। इससे पीडि़त को खाने-पीने, बात करने में काफी दिक्कत हो रही थी। इसे देखते हुए स्वजन उनके संपर्क में आए थे। उन्होंने बताया कि तंबाकू के सेवन से जीभ में कैंसर की स्थिति बनी थी। ऑपरेशन के बाद पीडि़त को खाने-पीने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही है और वे काफी राहत महसूस कर रहे हैं।
चार से पांच लाख होता खर्च-
डॉ.अभिषेक हरीश ने बताया कि अगर यही ऑपरेशन किसी अच्छे निजी चिकित्सा संस्थान में कराया गया होता तो कम से कम चार से पांच लाख रुपये खर्च करने पड़ते। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के पूर्व उन्होंने जरूरी सामानों की कमी की ओर अस्पताल के अधीक्षक डॉ.लखन सिंह का ध्यान दिलाया था, जिस पर उन्होंने सामानों की उपलब्धता सुनिश्चित की और ऑपरेशन जीभ का निश्शुल्क ऑपरेशन सफल हो पाया।

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