डीन ने याद किया उस पल को जब छत्तीसगढ़ का पहला सैंपल 21 जनवरी 2020 को उन्होंने स्वयं लिया था और जांच के लिए सैंपल भेजने करनी पड़ी थी मशक्कत

अंबिकापुर। राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय जिला चिकित्सालय के वायरोलॉजी लैब के दो वर्ष पूरे होने पर गुरूवार को लेक्चर हॉल में मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष पूजार्चना की गई और आरटीपीसीआर जांच में कोविड पॉजिटिव आने के बाद स्वस्थ्य होकर घर-परिवार के बीच खुशहाल जीवन-यापन कर रहे लोगों के दीर्घायु होने की कामना करते हुए केक काटा गया। इस लैब में स्थापना के बाद से अब तक दो वर्षों में तीन लाख 67 हजार आरटीपीसीआर जांच की गई है, जिसमें से लगभग 10 प्रतिशत 36 हजार 500 पॉजिटिव पाए गए। वहीं 70 हजार ट्रू नाट टेस्ट किए गए हैं। इस मौके पर मेडिकल कालेज के अधिष्ठाता डा.रमनेश मूर्ति और अस्पताल अधीक्षक डा.लखन सिंह ने कोविड संक्रमण के उस दौर को याद किया जब पीडि़तों की सेवा के लिए लैब से लेकर कोविड अस्पताल के अंदर-बाहर सेवा देने वाले डॉक्टर, नर्स, लैबोरेटरी के टेक्नीशियन, सहायक सहित सभी सहयोगियों की घर-परिवार से दूरी बन गई थी। इनकी हौसला आफजाई में वे लगे रहते थे।वायरोलॉजी लैब के दो वर्ष पूर्ण होने पर मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ.रमनेश मूर्ति ने कहा कि डायग्नोस्टिक विंग में इस लैब ने अद्वितीय एवं अग्रणी भूमिका निभाई है। आइसीएमआर से लैब को स्वीकृति मिलने के बाद इसकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी है। उन्होंने चीन के वुहान सिटी से मेडिकल का कोर्स पूरा करके लौटे एक छात्र व कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के बीच केरल सहित अन्य शहरों से लोगों की घर वापस के दौर को स्मरण किया। मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ.रमनेश मूर्ति ने आगे कहा कि जब पहला केस अस्पताल में आया तो छत्तीसगढ़ का पहला सेंपल जांच के लिए 21 जनवरी 2020 को उन्होंने स्वयं लिया था। यह ऐसा दौर था जब अंबिकापुर शहर के लोग कोरोना की भयावहता से अनजान थे। इस दौर में मेडिकल कालेज को जिम्मेदारी मिली और पहला सैंपल लेकर भेजने में ही नींद उड़ गई। सैंपल को कोई हाथ लगाने के लिए तैयार नहीं था। सैंपल को किसके माध्यम से पुणे लैबोरेटरी जांच के लिए भेजें इसके लिए मशक्कत करनी पड़ रही थी। बाद में एम्स व रायगढ़ में सैंपल की जांच होने पर कुछ राहत मिली। इस बीच कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या काफी बढ़ गई थी। मेडिकल कॉलेज को छोड़कर चिकित्सकों व सहयोगियों के साथ वे अस्पताल में डटे रहते थे। अस्पताल अधीक्षक डॉ.लखन सिंह ने कहा कि अस्पताल में आरटीपीसीआर लैब कैसा होगा, इसकी कल्पना के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की शासन से सहमति मिली और आरटीपीसीआर लैब की स्थापना पर जोर दिया गया, जो बिना लीडरशिप के संभव नहीं था। संस्था प्रमुख डॉ.रमनेश मूर्ति ने नेतृत्वकर्ता के रूप में इस दौर में अहम भूमिका निभाई, जिससे कोविड जांच के मामले में हम पूरे क्षेत्र में आगे हैं। इस दौरान इलाज व प्रबंधन में महति भूमिका निभाने वाली निश्चेतना विभाग की प्रमुख डॉ.मधुमिता मूर्ति के अलावा पैथालाजी विभाग के डॉ.आर्या, सहायक अधीक्षक डॉ.बीआर सिंह, डॉ.श्रीवास्तव, डॉ.अरूणेश सिन्हा, डॉ.ऐश्वर्या, आरटीपीसीआर लैब में सेवा देने वाले चिकित्सक, टेक्नीशियन, अस्पताल की सलाहकार प्रियंका कुरील, डाइटीशियन सुमन सिंह, मेट्रन सहित अस्पताल व लैब के अन्य चिकित्सक, कर्मचारी उपस्थित थे।ऐसे स्थापित हुआ वॉयरोलॉजी लैबमेडिकल कॉलेज के डीन ने कहा कि सैंपल भेजने और जांच में आने वाली दिक्कत को देखते हुए यहां कब वायरोलाजी लैब की स्थापना होगी, इसे लेकर सवाल उठते थे। इन्हीं झंझावातों के बीच 18 मई 2020 को वायरोलाजी लैब का ड्राइंग, डिजाइन सीजीएमएससी के साथ तैयार कर नोडल एम्स को भेजा गया, जिसे अनुमति मिली। 22 मई को शासन से वायरोलाजी लैब तैयार करने का अनुमोदन मिला। इसके बाद जर्जर भवन जिसे दंत विभाग के लिए चुना गया था, उसे वायरोलाजी लैब में तब्दील किया गया। तमाम चुनौतियों के बीच पालीपोक्सी फ्लोर युक्त भवन के ढांचे को मूर्तरूप दिया गया। दो माह के अंतराल में तैयार भवन में वायरोलाजी लैब के लिए आवश्यक संसाधन जुटाना भी चुनौती से कम नहीं था। सभी के अविरल और अथक प्रयास से संसाधन मिलने के बाद चार अगस्त 2020 को लैब संक्रिमितों की जांच के लिए उपयोगी बना। पीपीई किट पहनकर अस्पताल में काम करने को आदत में शुमार किया गया। इसके बाद लैब टेक्नीशियन जांच कितना सही कर पाएंगे इसके लिए निगेटिव व पॉजिटिव सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे गए, जिसमें टेक्नीशियन खरा उतरे। इसके बाद हर छह घंटे में कोविड-19 की जांच व रिपोर्टिंग होने लगी।3.67 लाख टेस्ट बड़ी उपलब्धिकोरोना के कठिन दौर में कोविड अस्पताल की शुरुआत के साथ जांच के लिए ट्रू नाट लैब की स्थापना सर्जिकल बर्न वार्ड में की गई थी, कालांतर में यहां काफी बदलाव आया है। हेपेटाइटिस, डेंगू जैसी अन्य बीमारियों के फैलाव की स्थिति में जांच इस लैब में किया जा सकता है। उन्होंने बताया कोरोना संक्रमण के दौर में एक दिन में 18 सौ सेंपल जांच का रिकार्ड इस लैब में बनाया गया था, जबकि उस समय जांच के लिए मशीन एक थी। उन्होंने बताया एमसीआइ के मानक को पूरा करने हर चिकित्सा संस्थान में वायरोलाजी लैब का होना अनिवार्य है।

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