रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी) लॉकडाउन का बड़ा खामियाजा क्षेत्र के सब्जी उत्पादक किसानों को उठाना पड रहा है जो टमाटर, खीरा 10 से ₹15 किलो होना चाहिए वह 1 से ₹2 किलो बेचने को किसान मजबूर हैं। स्थिति ऐसी निर्मित हो गई है कि कोई लेने वाला भी नहीं है यहां तक कि किसान टमाटर खीरा अपने खेत में ही सड़ने को छोड़ दे रहे हैं जिससे किसानों को एक अनुमान के मुताबिक 10 करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों को अपने उत्पादन का उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान हतोत्साहित एवं चिंतित

गौरतलब है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान टमाटर खीरा का उत्पादन करते आ रहे हैं वही यहां का टमाटर खीरा उत्तर प्रदेश झारखंड बिहार के विभिन्न शहरों तक जाता रहा है जिससे यहां के किसानों को अपने उपज का पर्याप्त मूल्य मिलता था परंतु लॉकडाउन होने के कारण खीरा एवं टमाटर बाहर नहीं जा पाया जिस कारण जो खीरा टमाटर का थोक मूल्य 10 से ₹15 किलो होना चाहिए था वह 1 से दो रुपए किलो रह गया है जिससे किसानों का लागत मूल्य भी निकलना मुश्किल हो रहा है। किसान बहुत चिंतित है कि किसान लागत मूल्य भी नहीं मिलने से इतने हतोत्साहित हो गए हैं कि खीरा टमाटर खेत में ही सड़ने ने को छोड़ दे रहे हैं। पिछले वर्ष भी हुई थी ऐसी स्थिति, रकबा हुआ आधा…….. किसान पहले सब्जी बहुत उत्साह से लगाते थे जिससे उन्हें पर्याप्त मूल्य भी मिल जाता था परंतु बीते वर्ष भी लॉकडाउन के कारण किसानों को अपनी फसल का मूल्य नहीं मिल पाया वहीं इस बार भी लाकडाउन लग जाने के कारण किसानों की स्थिति दयनीय हो ही गई है यहां तक कि पिछले वर्ष लागत मूल्य भी नहीं मिलने के कारण इस वर्ष सब्जी उत्पादन के लिए रकबा आधा से भी कम हो गया है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में किसान सब्जी और कम रकबा में लगाएंगे।/ इन गांव में होता है सब्जी का उत्पादन……. ग्राम पंचायत नगरा, कमलपुर, मितगई ,विजयनगर पुरुषोत्तमपुर, तामेश्वरनगर, सारंगपुर, चंदन नगर भाला, विजयनगर, मेघुलि, गम्हरिया महावीर गंज नेहरू नगर भीतियाही, पुरुषोत्तमपुर देवीगंज चंदनपुर संतोषी नगर पिपराही राधा कृष्ण, नगर महावीरगंज सहित अन्य ग्रामों में सब्जी का उत्पादन किसानों के द्वारा किया जाता है।/

10 करोड़ से अधिक का नुकसान होगा किसानों को……… एक अनुमान के मुताबिक क्षेत्र के किसानों के द्वारा 500 एकड़ से अधिक में सब्जी की खेती की गई है किसान को प्रति एकड़ कम से कम लागत मूल्य को छोड़कर 2 लाख रुपय का फायदा होना चाहिए था परंतु किसानों का लागत मूल्य भी नहीं निकल रहा है इस प्रकार किसानों को 10 करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है।/

प्रगतिशील किसान राकेश सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष भी हम लोगों को अपने सब्जी उत्पादन का उचित मूल्य नहीं मिल पाया था जिस कारण पिछले वर्ष की तुलना रकबा आधा कर दिया था परंतु इसके बाद भी इस वर्ष लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। टमाटर खेतों में पड़ा हुआ है उसे तुड़वाने का ओचित्य भी नहीं समझ में आ रहा है टमाटर तुड़वाने के बाद मजदूरी भी नहीं निकल पाएगा।/

इस संबंध में इंडोग्रीन क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड के क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक एस एन तिवारी ने बताया कि पिछले वर्ष किसानों को अपने सब्जी उत्पादन का लागत मूल्य भी नहीं मिल पाया था जिस कारण पिछले वर्ष की तुलना इस वर्ष 40 प्रतिशत रकबे में ही सब्जी का उत्पादन किसानों के द्वारा किया गया था परंतु इसके बाद भी खपत न हो पाना एवं उचित मूल्य नहीं मिल पाना बहुत ही चिंता का विषय है किसान इससे हतोत्साहित हो रहे हैं एवं सब्जी उत्पादन से मोहभंग भी होगा आने वाले समय में बाजार की व्यवस्था इससे बिगड़ेगी।

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