परहिया पंडो समाज ने निकाली भव्य रैली, बलरामपुर जिले में पुराने राजस्व दस्तावेजों में काटछांट का आरोप


परंपरागत अस्त्रों के साथ पण्डो समाज के लोग पहुंचे संभाग मुख्यालय

अंबिकापुर। पण्डो जनजाति के वर्ष 1954-55 के पुराने राजस्व अभिलेख और सरगुजा स्टेट के सेटेलमेंट दस्तावेजों में उल्लेखित पण्डो जाति को काटकर परहिया बनाने व सामान्य जाति बताकर प्रताडि़त करने का आरोप लगा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में प्रदेश अध्यक्ष उदय पण्डो के नेतृत्व में हजारों लोग एकजुट हुए और शहर के पीजी कॉलेज मैदान से रैली के शक्ल में संभाग आयुक्त कार्यालय पहुंचकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन, धरना-प्रदर्शन, चक्काजाम, पदयात्रा करने की चेतावनी दी गई है। रैली में शामिल पंडो जनजाति के लोग हाथों में तख्तियां लिए परंपरागत अस्त्रों के साथ चल रहे थे।  


संभाग आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेखित है छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग अंतर्गत बलरामपुर-रामानुजगंज जिला के रामचंद्रपुर, वाड्रफनगर, बलरामपुर, शंकरगढ़ ब्लॉकों में पण्डो जनजाति के लोग स्टेट जमाने से निवासरत हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य में विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा प्राप्त है। आरोप है कि इनके अशिक्षित और भोलेपन का गलत लाभ लेने भू-माफियाओं, अधिकारियों द्वारा 1954-55 के पण्डो जनजाति के पुराने राजस्व दस्तावेजों, अधिकार अभिलेख में लिखे पण्डो जाति के अभिलेख को बदल कर वर्ष 2019-20 व 2021-22 में परहिया जाति बनाया गया है, जो वर्तमान में स्पष्ट नजर आ रहा है। पुराने राजस्व दस्तावेजों में पण्डो जाति काटकर सरनेम या उप जाति परहिया करने से ये सामान्य जाति की श्रेणी में आ गए और इनका जमीन कौड़ी के दाम में रजिस्ट्री करा लिया गया है। यही नहीं बलरामपुर-रामानुजगंज के पण्डो जनजाति के लोगों का परहिया उल्लेख कर देने से इन्हें जनजाति, आदिवासी वर्ग को दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है। इनके पैतृक अचल संपत्ति को लूटने शारीरिक, मानसिक सहित कई प्रकार की प्रताडऩाओं का शिकार बनाया गया। पुराने दस्तावेजों में कांट-छांट करने से इनका जाति प्रमाण पत्र नहीं बनाया जा रहा है, जिससे बलरामपुर जिला के पण्डो शिक्षा तथा अन्य सभी क्षेत्रों में आठ दशक पीछे हैं। इनके शैक्षणिक सहित अन्य दस्तावेजों में जाति पण्डो लिखा है, लेकिन सेटेलमेंट राजस्व रिकार्ड इन्हें पण्डो की जगह परहिया बता रहा है। पण्डो जनजाति का उप जाति परहिया होता है, जिसे पूर्व में पण्डो जनजाति के लोग अपने नाम के आगे सरनेम में लिखते थे। पण्डो समाज के लोगों ने गलत लाभ लेने के लिए भविष्य में भी पुराने दस्तावेजों में छेड़छाड़ की शंका जाहिर की है। पुराने दस्तावेज में असंवैधानिक तरीके से छेड़छाड़ करने वालों के विरूद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।


कैसे बदला इनका दस्तावेज
सर्व विशेष पिछड़ी जनजाति समाज कल्याण समिति छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष उदय कुमार पण्डो का कहना है कि बलरामपुर जिला के सोमारू वल्द बुटन, जगदेव वल्द धनी, झुरई परहिया वल्द दसई परहिया, बोलो परहिया वल्द दसई परहिया के अधिकार अभिलेख सन 1954-55 में पण्डो जाति उल्लेखित दस्तावेजी रिकार्ड वर्ष 2019-20 से 2021-22 के बीच बदल गया। आरोप है मूल रजिस्टर बदल कर फर्जी रजिस्टर बना इसमें परहिया सामान्य जाति बनाया गया है, जो वर्तमान में स्पष्ट रूप से दिख रहा है। इसी प्रकार महावीर परहिया वल्द बनाधर परहिया के सरगुजा स्टेट सेटलमेंट में, कौम पण्डो लिखा हुआ है, इसे काटकर परहिया सामान्य जाति बनाया गया है, इनके पुत्र-पुत्री बलदेव पण्डो वल्द महावीर पण्डो, देव वंशी वल्द महावीर पण्डो, सुखमनी पण्डो वल्द महावीर पण्डो के नाम दर्ज अधिकार अभिलेख 1954-55 में जाति पण्डो लिखा हुआ है।


ये समस्याएं आड़े आ रही
0 परहिया को सामान्य जाति बताकर जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है।
0 जाति प्रमाण पत्र के अभाव में पण्डो (परहिया) परिवार शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। गरीबी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। छात्रावास, छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिलता है।
0 शिक्षा के अभाव में बीमार पडऩे पर अंधविश्वास में पड़ते हैं, जिस कारण इनमें खून की कमी, कुपोषण जैसी शिकायतों के बीच इनकी मौत हो जाती है।
0 जाति प्रमाण पत्र के अभाव में पण्डो परहिया लोगों को अमानवीय रूप से पेड़ से बांध कर मारपीट जैसे मामले सामने आते हैं, जिस पर सही कार्रवाई नहीं हो पाती है।
0 पण्डो परहिया को सामान्य जाति बोलकर बंधक बना दबंगों के द्वारा काम कराया जाता है। प्रताडऩा के भय से आठ दिनों तक जंगल में छिपकर रहने जैसा मामला भी सामने आया है।
0 पण्डो, परहिया को सामान्य जाति बताने से किसी घटना के बाद एक्ट्रोसिटी एक्ट की कार्रवाई नहीं होती है, जिससे दबंगों के हौसले बुलंद हैं।
0 सामान्य वर्ग में दर्शाने से पैतृक चल-अचल संपत्ति को हड़पने का काम किया जा रहा है।
पण्डो समाज की मांग
0 पण्डो-परहिया व भुइहार को एक मानते हुए पण्डो जनजाति का जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
0 बिना सेटेलमेंट वाले पण्डो जनजाति के लोगों का सरलीकरण प्रक्रिया से ग्राम सभा के पर जाति प्रमाण बनवाया जाए।
0 पण्डो जनजाति को केंद्र के विशेष पिछड़ी जनजाति के सूची में शामिल किया जाए।
0 पण्डो जनजाति के 1954-55 के राजस्व दस्तावेजों, अधिकार अभिलेखों एवं सरगुजा स्टेट के सेटेलमेंट में लिखे पण्डो जाति को काटकर उप जाति, सरनेम परहिया को सामान्य जाति बनाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।
0 पण्डो जनजाति के पुराने राजस्व दस्तावेजों, अधिकार अभिलेखों और सरगुजा स्टेट सेटेलमेंट रिकार्ड, पुराने शैक्षणिक दस्तावेज, दाखिल-खारिज को सुरक्षित रखने रिकॉर्ड रूम में गोपनीयता का कड़ाई से पालन कराया जाए।
0 ग्राम पंचायत दोलंगी रामचंद्रपुर ब्लॉक के सोमारू वल्द बुटन एवं जगदेव वल्द धनी पण्डो के अधिकार अभिलेख 1954-55 का नकल 2019 में निकलवाने पर इसमें पण्डो उल्लेख था, 2022 में नकल निकलवाने पर रजिस्टर बदल कर जाति परहिया बनाया गया। ऐसे में सन 1954-55 के मूल रजिस्टर को जांच कर सुरक्षित रखा जाए।
0 बलरामपुर जिला में पण्डो के उप जाति परहिया, सामान्य जाति के नाम पर होने वाली जमीन की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाया जाए।

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