राजू ठाकुर – बलरामपुर – जिले में खाद की किल्लत अब किसानों के लिए चिंता का कारण बनने लगा है खाद की कमी के कारण खाद दुकान दार किसानों को मनमाने दर पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है स्थिति यह है कि दो दिन पहले तक बलरामपुर में 520रु प्रति बोरी बिकने वाला खाद आज 600रु में बिकने लगा है इसके बावजूद किसान पैसा लेकर के खाद के लिए मारे मारे फिर रहे खाद की यह किल्लत बनावटी बताई जा रही हैं और बड़े पैमाने पर इसकी तस्करी खुलेआम जारी है ।

हालत यह है कि झारखंड से खाद खुलेआम रामानुजगंज सीमा स्थित बैरियर से दिनदहाड़े लाई जा रही है जिसे सीमा पर तैनात शासकीय कर्मचारियों का खुलेआम संरक्षण प्राप्त है महज कुछ रुपए के कारण जिले के जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारीगण किसानों के शोषण को संरक्षण दे रहे हैं जिसका खामियाजा इस जिले के किसानों को इस रूप में उठाना पड़ रहा है 266 रु में बिकने वाला खाद 600 रु मे किसानों को लेना पड़ रहा है एक ओर सरकार किसानों से अपेक्षा करती है कि किसान बड़े पैमाने पर कृषि उपज ले दूसरी ओर उन्हें सरकार के संरक्षण में शोषण का शिकार होना पड़ रहा है किसान खून के आंसू ना रोए तो क्या करेंगे इस वर्ष मौसम ने किसानों का अच्छा साथ देने का मन बनाया तो सरकार ही इन किसानों के शोषण में संलिप्त नजर आ रही है झारखंड सीमा से आने वाली यूरिया खाद किस सीमा तक सही है असली है या नकली मिलावट युक्त है या खालिस शुद्ध है इसकी भी गुणवत्ता प्रशिक्षण सवालों के दायरे में है जिले में अभी धान और मक्के की फसल को बड़े पैमाने पर यूरिया खाद की जरूरत है महसूस की जा रही है किंतु जिले के जिम्मेदार आला अधिकारीगण इस और से मुंह छुपाए हुए बैठे हैं जिसके कारण किसानों को अपनी खुद से बरामद जदो जहद कर खाद की व्यवस्था करनी पड़ रही है ताकि वह बेहतर फसल ले सकें और खून पसीने से कमाया जा रहे धनधान्य के लिए उन्हें और आंसू ना बहाना पड़े ।

करोना काल में पहले ही जिले के पूरी अर्थव्यवस्था को चौपट कर रखा है सभी के माथे पर शिकन की बहुत गहरी रेखाएं खींच गई हैं ऐसे में महज फसल से ही उम्मीद की जा रही है किंतु खाद की किल्लत और इसे प्राप्त करने के लिए किसानों की जांमारी ने इस पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं जिले के किसानों ने संवेदनशील कलेक्टर श्याम धावडे से अपेक्षा की है कि खाद के मामले में आगे बढे ताकि किसानों की उम्मीद है जो फसल के रूप में खेतों में लहलहा रही है उन्हें बेवक्त महज थोड़ी सी उदासीनता के कारण अकाल का सामना ना करना पड़े रामानुजगंज स्थित झारखंड बेरिया छत्तीसगढ़ राज्य की धड़कन कहीं जा सकती है यहां से झारखंड बिहार के लोग प्रतिदिन बड़े पैमाने पर वाहन मोटरसाइकिल व पद यात्रा के रूप में प्रवेश करते हैं और बलरामपुर जिले सहित पूरे राज्य में बिखर जाते हैं ऐसे में ईश बैरियर को प्रदेश का सबसे संवेदनशील क्षेत्र भी माना जाता है कनहर नदी पर लगे इस सीमा रेखा बैरियर पर जिला प्रशासन के विभाग अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन की दृष्टि से कर्तव्य रत देखे जाते हैं बावजूद इसके खुलेआम यदी अवैध रूप से परिवहन करते हुए कोई वाहन यदि छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश कर जाए तो आम जनता द्वारा सवाल उठाया जाना लाजमी है और फिलहाल तो बात खाद के किल्लत व संकट की हो रही है साथ ही यह भी नहीं भूलना चाहिए कि यही बैरियर बलरामपुर जिले में कोरोना बम विस्फोट का सबसे बड़ा जिम्मेदार हो सकता है ।

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