अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी। छत्तीसगढ़ – झारखंड की सीमा पर स्थित नक्सलियों के सुरक्षित मांद बूढ़ापहाड़ इलाके में शनिवार दोपहर को लैंडमाइंस ब्लास्ट हो गई. यह धमाका लातेहार के जोंकपानी के जंगल में हुआ है। अब तक की जानकारी में इस विस्फोट की चपेट में एक ग्रामीण आया है।

मीडिया से हुई बातचीत में पलामू डीआईजी राजकुमार लकड़ा ने बताया कि घटना की जानकारी मिली हैं. मामले की जांच की जा रही है। वहीं छत्तीसगढ़ राज्य के बलरामपुर जिला के उपपुलिस अधीक्षक नक्सल ऑपरेशन डीके सिंह ने छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइन से घटना स्पस्ट नहीं होने की जानकारी बताई हैं।

जानकारी के अनुसार नक्सलियों के गढ़ बूढ़ापहाड़ में जोंकपानी के इलाके में लैंडमाइंस ब्लास्ट हुआ है। इस विस्फोट में टुन्नू यादव नामक ग्रामीण 35 वर्षीय चपेट में आया गया. जिससे की मौत हो गई. सूत्रों से जानकारी सामने आई हैं कि नक्सलियों ने ही ग्रामीण का शव परिजनों को सौंपा हैं. मृतक छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला के पिपराढाबा का निवासी बताया जा रहा हैं. जिसका ग्राम जलजली में भी घर हैं।

नक्सलियों का सुरक्षित स्थान माना जाता है बूढ़ा पहाड़

माओवादियों का सुरक्षित इलाका माना जाने वाला बूढापहाड़ के इलाके में शनिवार को लैंडमाइंस विस्फोट हुआ है. यह विस्फोट लातेहार के जोंकपानी के जंगल में हुआ। पास के गांव का टुन्नू यादव नामक युवक बूढ़ापहाड़ से सटे जंगलों में मवेशी चराने गया था, इसी क्रम में टुन्नू यादव का पैर लैंडमाइंस पर पड़ा और धमाका हो गया। लैंडमाइंस की चपेट में आने से टुन्नू का पैर शरीर से अलग हो गया। जिस इलाके में यह घटना हुई है. उस इलाके में मोबाइल नेटवर्क नहीं है। घटना शनिवार दोपहर की बताई जा रहीं हैं. तथा रविवार दोपहर 12 बजे नक्सलियों ने टुन्नू का शव जंगल से निकालकर परिजनों को सौंपा है।

सुरक्षाबलों को टारगेट कर लगा हैं लैंड माइंस

छत्तीसगढ़ राज्य के बलराममपुर – रामानुजगंज जिला के सबाग चौकी से लगे झारखंड राज्य के लातेहार अंतर्गत गारु थाना क्षेत्र का जोंकपानी इलाका बूढ़ापहाड़ की तलहटी में मौजूद है। माओवादियों ने सुरक्षाबलों को टारगेट के लिए लैंडमाइंस को जंगलों में लगाया हैं। अक्सर मवेशियों की चपेट में आने से मौत होने की सूचना आते रहती हैं. इसी बीच उक्त ग्रामीण की भी मवेशी चराने के दौरान घटना की सुचना सामने आई हैं. जिसकी चपेट में आने से लैंडमाइंस विस्फोट हो गया। धमाके के बाद बाकी ग्रामीण वहां से भाग गए। जिस इलाके में यह घटना हुई वह इलाका अतिनक्सल प्रभावित माना जाता रहा हैं और माओवादियों का सुरक्षित मांद भी माना जाता है।

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