प्रतापपुर। सूरजपुर जिले में एक और हथिनी की मौत 11 हजार किलोवाट के झूलते तार की चपेट में आने से गर्भवती हथिनी की मौत हो गई। मामला प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के दरहोरा के आसनपारा गांव की है। यहां तीन हाथियों का दल विचरण कर रहा था। हादसे के तुंरत बाद गांव के लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलने पर वन विभाग के डीएफओ सहित वन अमला मौके पर पहुंचा। लापरवाही किसकी है यह अस्पष्ट है। पहली नजर में हथिनी की मौत को जिम्मेदार वन विभाग को मान रहे हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ में मानव-हाथी द्वंद पिछले दो दशक से चल रहा है। कभी हाथी को जान गंवानी पड़ती है तो कभी ग्रामवासी हाथी के कोप का शिकार बनते हैं।
जानकारी के मुताबिक मंगलवार की रात हाथियों का दल विचरण करते हुए सूरजपुर जिले के प्रताापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम दरहोरा के आसनपारा में पहुंच गया। दल में शामिल एक गर्भवती हथिनी काफी नीचे झूल रहे 11 हजार केवी तार की चपेट में आ गई। दो अन्य हाथी तार के नीचे से निकल गए। इधर करंट लगने से हथिनी तड़प कर चिंघाडने लगी। उसके चिंघाडने की आवाज ग्रामीणों ने सुनी, जिससे वे भयभीत हो गए। कुछ ही देर में हथिनी की मौत हो गई। सुबह हथिनी की लाश ग्रामीणों ने देखी तो इसकी सूचना वन विभाग को दी। इस पर सीसीएफ सरगुजा, सीएफ वाइल्ड लाइफ, डीएफओ सूरजपुर तथा प्रतापपुर, रमकोला, घुई, ओडगी, भैयाथान के रेंजर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटना की जांच की। इसके बाद पशु चिकित्सक डॉ.महेंद्र पांडे की अगुवाई में टीम ने मृत हथिनी के शव का पीएम किया। पीएम के दौरान हथिनी के गर्भ से शावक भी मृत अवस्था में निकला, उसे भी करंट लगा था। हथिनी व शावक के पीएम के बाद दोनों को घटनास्थल पर ही दफना दिया गया। हथिनी 17 माह की गर्भवती थी, शावक मेच्योर हो गया था।
वन विभाग की घोर लापरवाही-
मामले में वन विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार हाथी रहवास क्षेत्र में 11 हजार केवी के बिजली तार की ऊंचाई जमीन से चार से पांच मीटर होनी चाहिए। ताकि विचरण के दौरान हाथी इसकी चपेट में न आ सकें लेकिन दरहोरा के आसनपारा में बिजली का तार काफी नीचे झूल रहा था। इसी कारण से मंगलवार की देर रात जब हाथियों का दल यहां पहुंचा तो गर्भवती हथिनी नीचे झूल रहे 11 केवी के तार की चपेट में आ गई व तड़पकर दम तोड़ दी।
