बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों ने भविष्य की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की
अंबिकापुर। बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षकों ने शहर में कैंडल मार्च करके स्व. हेमा सिंह को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। कैंडल मार्च में निकले सहायक शिक्षकों ने कहा कि न्यायापालिका के निर्णय के कारण मानसिक तनाव से गुजर रही बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षिका स्व. हेमा सिंह छत्तीसगढ़ शासन से न्याय की उम्मीद में अपनी नौकरी सुरक्षित करने के लिए जिलाधीश दंतेवाड़ा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर वापस लौटते समय जान गंवा बैठी। ऐसे हालात प्रदेश भर में बीएड प्रशिक्षित शिक्षकों के साथ न बने, इस पर प्रदेश सरकार को ध्यान देना चाहिए। बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षक अमित कुमार सिन्हा ने कहा कि सरगुजा में 3000 सहायक शिक्षकों नहीं बल्कि 3000 परिवारों की रोजी-रोटी से जुड़ा यह मुद्दा है, जो न्यायपालिका के निर्णय के बाद खुद को मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। दंतेवाड़ा में शिक्षिका की मौत से समझा जा सकता है कि जिलाधीश को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर लौटते वक्त उसकी मनोदशा किस प्रकार की रही होगी, मन में किस प्रकार का बोझ लेकर गाड़ी चला रही होगी, कि सड़क हादसे का शिकार बन गई। हमें ऐसा आश्वासन मिले, जिससे भविष्य सुरक्षित नजर आए। सरकार को ऐसा अध्यादेश लाना चाहिए जिससे उन्हें डीएड करने का मौका मिले और नौकरी सुरक्षित रहे। मिलन कुमार पटेल ने कहा कि विपक्ष में रहते उनके पक्ष में आवाज उठाने वाले आज कैबिनेट में हैं, वे चाहें तो बीएड प्रशिक्षित शिक्षकों के पक्ष में सकारात्मक निर्णय अध्यादेश लाकर ले सकते हैं। आवश्यकता योग्यता पूरी करने तक प्रतिनियुक्ति सरकार को देना चाहिए, ताकि उनकी नौकरी पर आंच न आने पाए और पूरा परिवार तबाह होने से बच सके।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2023 के फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा है कि फैसले के पहले हुई भर्ती पर इसका असर नहीं पड़ेगा। यानि जिन बीएड डिग्रीधारक प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति फैसला आने के पहले हो चुकी थी, भर्ती के विज्ञापन में बीएड को भी योग्यता में शामिल माना गया था, उनकी नौकरी बनी रहेगी। इसके साथ भी एक शर्त है कि किसी अदालत से उनकी अयोग्यता के बारे में कोई आदेश नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पूरे देश के लिए है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि प्राथमिक शिक्षक पद पर भर्ती के लिए बीएड डिग्री धारक योग्य नहीं हैं। केवल बीटीसी (डीएलएड ) डिप्लोमा धारक ही प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ाने के पात्र होंगे। लेवल-1 (पहली से 5वीं कक्षा तक) में बीएड अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पाएंगे। इससे बीएड के बाद सेवा देने वाले शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। वहीं छत्तीसगढ़ में छह हजार से अधिक पदों पर बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों की नियुक्ति की पहल होने से

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