कश्मीर में यह किसी कश्मीरी हिंदू की पहली हत्या नहीं है। वहां रह-रह कर न केवल कश्मीरी हिंदू निशाना बनाए जा रहे हैं बल्कि काम-धंधे की तलाश में वहां जाने और रहने वाले गैर कश्मीरी भी आतंकियों के निशाने पर हैं।

पुलवामा में संजय शर्मा नामक कश्मीरी हिंदू की हत्या सरकार के उन दावों पर सवाल खड़ा करने वाली है कि वहां के हालात सामान्य हो रहे हैं। संजय शर्मा की जिस तरह दिनदहाड़े हत्या की गई और एक आतंकी संगठन की ओर से उसकी जिम्मेदारी लेने से भी संकोच नहीं किया गया, उससे यही पता चलता है कि आतंकियों का दुस्साहस अभी भी बढ़ा हुआ है और वे कश्मीर में अल्पसंख्यकों को चुन-चुनकर निशाना बनाने में सक्षम हैं।

कश्मीर में यह किसी कश्मीरी हिंदू की पहली हत्या नहीं है। वहां रह-रह कर न केवल कश्मीरी हिंदू निशाना बनाए जा रहे हैं, बल्कि काम-धंधे की तलाश में वहां जाने और रहने वाले गैर कश्मीरी भी। यह सही है कि कश्मीरी हिंदुओं और गैर कश्मीरियों को निशाना बनाने वाले आतंकी आखिरकार मार गिराए जाते हैं, लेकिन उन्हें निशाना बनाने का सिलसिला जिस तरह थम नहीं रहा, वह चिंता की बात है। यदि घाटी में कश्मीरी हिंदुओं को इसी तरह निशाना बनाने का सिलसिला कायम रहा तो वहां से पलायन करके जम्मू और देश के दूसरे हिस्सों में आ बसे कश्मीरी पंडितों को वापस ले जाकर बसाना कठिन होगा।

सरकार कुछ भी दावा करे, जब तक कश्मीरी हिंदू अपने घरों को वापस नहीं लौटते, तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि वहां के हालात सामान्य हो रहे हैं। राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार को ऐसे जतन प्राथमिकता के आधार पर करने होंगे, जिससे कश्मीरी हिंदू अपने घरों को लौट सकें। इसके लिए आवश्यक हो तो लीक से हटकर कठोर कदम उठाने में भी हिचकिचाहट नहीं दिखानी चाहिए। आतंकियों को ऐसा कोई संदेश देने की सख्त जरूरत है कि वे कुछ भी कर लें, सरकार कश्मीरी हिंदुओं की घर वापसी कराके ही चैन से बैठेगी।

यह सही समय है कि केंद्र और राज्य सरकार इस पर विचार करें कि कश्मीर में वैसा माहौल कैसे बनाया जाए, जिससे कश्मीरी हिंदू अपने घरों को लौट सकें और वहां सुरक्षित भी रहें। पुलवामा में आतंकियों का निशाना बने संजय शर्मा उन चंद कश्मीरी हिंदुओं में से थे, जिन्होंने तब भी पलायन नहीं किया था, जब कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था और उसके चलते अधिकांश कश्मीरी हिंदू वहां से भाग आए थे।

एक और कश्मीरी हिंदू की हत्या के बाद एक ओर जहां बचे-खुचे कश्मीरी हिंदू कश्मीर से पलायन करने के बारे में सोच सकते हैं, वहीं दूसरी ओर वे कश्मीरी हिंदू वापसी के विचार का परित्याग कर सकते हैं, जो जम्मू में रह रहे हैं। कश्मीरी हिंदू की कायरना तरीके से हत्या के बाद राज्य प्रशासन के लिए उन हिंदू कर्मचारियों को वापस घाटी जाकर काम करने के लिए मनाना कठिन होगा, जो पहले से ही वहां जाने से कतरा रहे हैं और यह मांग करने में लगे हुए हैं कि उन्हें जम्मू में ही नौकरी करने दी जाए।

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