रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- नगर से होकर बहने वाली कन्हर  नदी की पहचान यहां के विभिन्न प्रकार के अद्भुत पत्थरों से थी एनीकट बनने के बाद नदी में रेत भरने के कारण एनीकट के ऊपर के पत्थरों का अस्तित्व समाप्त हो गए परंतु एनीकट के नीचे स्थित हथिया पत्थर एवं राम सिला पत्थर आज भी नदी की खूबसूरती को बढ़ा रहा है। हथिया पत्थर को देखने अभी भी लोग दूर-दूर से आते हैं।
     

गौरतलब है कि रामानुजगंज कन्हर नदी में राम मंदिर घाट से शिव मंदिर घाट तक के पत्थरों का नामकरण दशकों पूर्व उनकी आकृति के अनुसार हुआ था। जिसमें बुढ़वा बुढ़िया पत्थर, उटवा पत्थर, जहाज पत्थर सहित अन्य विभिन्न आकृतियों के पत्थर थे जो नदी के विशेष आकर्षण का केंद्र रहते थे नदी देखने आने वाले इन पत्थरों को जरूर देखते थे परंतु एनीकट बनने के बाद एनीकट के ऊपर जितने भी पत्थर थे सब का अस्तित्व खत्म हो गया वहीं आज भी हथिया पत्थर लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हथिया पत्थर के बगल में रामशिला पत्थर की भी अद्भुत कलाकृति है।

पत्थरों की अद्भुत कलाकृति थी नदी की पहचान- कन्हर नदी में राम मंदिर घाट से शिव मंदिर घाट तक विभिन्न प्रकार के पत्थर जो प्राकृतिक रूप से अद्भुत कलाकृति की थी परंतु नदी में रेत भरने के कारण पत्थरों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया।

बैठे हुए हाथी जैसा दिखता है हथिया पत्थर- अंतर्राज्यीय पुल के नीचे हथिया पत्थर को अगर ध्यान से देखें तो स्पष्ट नजर आता है कि जैसे हाथी   बैठा हआ हो। अंतर्राज्यीय पुल के ऊपर से भी हथिया पत्थर स्पष्ट नजर आता है।

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