पूर्व में पदस्थ अधिष्ठाता डॉ.विष्णु दत्त रोजाना समय निकाल यहां करते थे सोनोग्राफी
अंबिकापुर। राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी के लिए एक बार फिर सौ बिस्तर मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में जांच सुविधा बहाल कर दी गई है। पूर्व में भी इस भवन में सोनोग्राफी की जांच के लिए अत्याधुनिक जांच की मशीन लगाई गई थी, जहां स्वयं तत्कालीन मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ.विष्णु दत्त सोनोग्राफी जांच एक नीयत समय तक करने के लिए स्वयं बैठ जाते थे। उनके समय में बनाई गई यह व्यवस्था बाद में अचानक बंद हो गई थी, जिससे गर्भवती माताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। एक्स-रे और सोनोग्राफी जांच की व्यवस्था वर्तमान में अस्पताल के मुख्य भवन के एक ही कक्ष में होने के कारण भीड़-भाड़ का सामना करते लंबा इंतजार गर्भवती महिलाओं को करना पड़ता था। इससे निजात दिलाने के लिए एक बार फिर काफी दिनों से एमसीएच के प्रथम माले के ओपीडी से लगे एक कक्ष में बंद पड़ी सोनोग्राफी मशीन की धूल की परत को हटा इसे जांच के उपयोग में लाया जाने लगा है। सोमवार से इस मशीन को जांच के लिए चालू कर दिया गया है। यहां रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक डॉ.ललित अग्रवाल को सोनोग्राफी जांच की जिम्मेदारी मिली है। इसके बाद गर्भवती महिलाओं को सड़क पार कर मुख्य अस्पताल भवन में सोनोग्राफी जांच के लिए नहीं आना पड़ेगा।
कलर डॉप्लर जांच की खलती है कमी-
राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सालय महाविद्यालय में सोनोग्राफी की सामान्य जांच तो आसानी से हो जाती है लेकिन कलर डॉप्लर के लिए गर्भवती माताओं को लेकर स्वजन निजी जांच सेंटरों का चक्कर काटते नजर आते हैं। गर्भवती माताओं के प्रसव की निश्शुल्क सुविधा शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध होने और प्रोत्साहन राशि व प्रसूता के परिवहन के लिए महतारी 102 की अस्पताल से घर वापसी तक की सुविधा मिलने के कारण संस्थागत प्रसव को लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक लोगों में जागरूकता आई है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में दाई ही महिलाओं का प्रसव करा देती थी। समय के साथ बदले हालात और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक मिलने वाली प्रसव की सुविधा के कारण लोग बिना समय गंवाए सीधे 102 नंबर पर डॉयल कर वाहन सुविधा प्राप्त कर अस्पताल तक पहुंच जाते हैं। जटिल परिस्थिति में कलर डॉप्लर जांच के लिए चिकित्सक के द्वारा लिखे जाने पर अस्पताल में इस सुविधा का नहीं मिलना खलता है।
निजी संस्थानों का शुल्क पड़ता है भारी-
कलर डॉप्लर जांच की सुविधा शहर के जिन चिकित्सा व जांच संस्थानों में हैं, वह दो से तीन हजार है। चिकित्सकों का कहना है कि कलर डॉप्लर में वास्तव में गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति क्या है इसका पता चल पाता है। निजी जांच सेंटरों में सामान्य सोनोग्राफी जांच का नौ सौ रुपये लिया जाता है, वहीं मेडिकल कॉलेज अस्पताल सहित अन्य शासकीय अस्पताल जहां यह जांच सुविधा उपलब्ध है, वहां निश्शुल्क है। जटिल परिस्थितियों में कलर डॉप्लर जांच हर तीन-चार दिन के अंतराल में करानी पड़ती है, जिसमें हर बार दो से तीन हजार रुपये खर्च करना पड़ता है। तीन-चार बार कलर डॉप्लर सोनोग्राफी जांच कराने में आठ से दस हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। इसे देखते हुए अस्पतालों में ऐसे रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक की पदस्थापना व जांच सुविधा जरूरी है जो कलर डॉप्लर मशीन का संचालन कर सके।

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