असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक धूं-धूं कर जला रावण का पुतल

बुराई पर अच्छाई की जीत का सबसे बड़ा उदाहरण है दशहरा : रेणुका सिंह

मनेंद्रगढ़ (एमसीबी) । एमसीबी जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ के हाई स्कूल दशहरा मैदान में विशाल आतिशबाजी के बीच दशहरा महोत्सव मनाया गया । भगवान श्रीराम के अग्निबाण लगते ही पल भर में असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक रावण का पुतला धूं-धूं कर जल कर राख हो गया । दशहरा महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतपुर सोनहत विधायक रेणुका सिंह उपस्थित रहीं । युवा मंच द्वारा आयोजित दशहरा महोत्सव में भारी संख्या में जनसमूह पहुंचा हुआ था जिन्होंने रंग बिरंगी एक से बढ़कर एक आतिशबाजी के नजारे को देखकर रावण दहन का भरपूर आनंद लिया । दशहरा महोत्सव की मुख्य अतिथि विधायक रेणुका सिंह ने दशहरा मैदान में उपस्थित जन समुदाय सहित एमसीबी जिले वासियों को विजयादशमी दशहरा पर्व की बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बुराई पर अच्छाई की जीत का सबसे बड़ा उदाहरण है दशहरा। दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन के महत्वपूर्ण आदर्शों का पालन करने की प्रेरणा भी देता है। यह सिखाता है कि सच्चाई, धर्म, और न्याय का मार्ग हमेशा सफल होता है। कठिनाइयों के बावजूद अपने कर्तव्यों का पालन करते रहना चाहिए। जीवन में चाहे कितनी भी चुनौतियां आएं, हमें धर्म, सत्य और अच्छाई के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए। मुख्य अतिथि रेणुका सिंह ने कहा कि यह त्योहार हमें सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली हो, अंत में सत्य और धर्म की ही जीत होती है । उन्होंने बताया कि विजयादशमी, जिसे दशहरा के नाम से जाना जाता है, भारत में मनाया जाने वाला एक महत्त्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन रावण पर भगवान राम की विजय का प्रतीक है। दशहरा अनेक सामाजिक, नैतिक संदेश देता है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली हो, अंत में सत्य और धर्म की ही जीत होती है। रावण का अंत गवाह है कि अधर्म और अहंकार का अंत निश्चित है। भगवान राम की जीवन गाथा हमें धैर्य, करुणा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का महत्व सिखाती हैं। दशहरा हमें बुरी आदतें त्यागने और सद्गुण अपनाने का संदेश भी देता है। हर मनुष्य को अपने अंदर के रावण, यानी- गुस्सा, घमंड, लालच, जलन को खत्म करने की सीख देता है ।

देवी दुर्गा ने अहंकारी महिषासुर के साथ आक्रमण कर किया वध

दशहरा महोत्सव में आम जनमानस को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि रेणुका सिंह ने कहा कि देवी दुर्गा ने महिषासुर पर आक्रमण कर उससे नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया। इसी उपलक्ष्य में हिंदू भक्तगण दस दिनों का त्यौहार दुर्गा पूजा मनाते हैं और दसवें दिन को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। जो बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। दुर्गा पूजा में माता दुर्गा के महिषासुरमर्दिनी रूप की पूजा की जाती है। विधायक रेणुका सिंह ने बताया कि असुरों के राजा रंभासुर और भैंस के संयोग से महिषासुर का जन्म हुआ । महिषासुर ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था कि कोई पशु और पुरुष उसका अंत नहीं कर पाए । वरदान पाने के बाद महिषासुर ने तीनों लोकों में आतंक मचाया और भयंकर नरसंहार किया । महिषासुर भले ही असुरों का राजा था लेकिन वह सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी का महान भक्त था । उसने अपनी तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया इसके बाद उसने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा कि कोई भी देवता और दानव उस पर विजय प्राप्त नहीं कर सके । ब्रह्मा जी ने महिषासुर से कहा जन्मे हुए सभी प्राणी का मरना तय होता है इसलिए मृत्यु को छोड़कर जो चाहे, वर मांग लो । तब महिषासुर ने कहा देवता, असुर और मानव किसी के हाथों मेरी मृत्यु नहीं हो आप किसी स्त्री के हाथों मेरी मृत्यु निश्चित करने की कृपा करें ब्रह्मा जी ने महिषासुर को यह वरदान दे दिया । इसके बाद महिषासुर स्वर्ग लोक में देवताओं और धरती पर मनुष्यों को सताने लगा । महिषासुर के आतंक से देवगण और मनुष्य सभी परेशान हो गए । परेशान होकर सभी देवगण ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास पहुंचे । लेकिन अजय होने के वरदान के कारण सभी उससे हार गए । महिषासुर के आतंक को समाप्त करने के लिए ही मां भगवती को जन्म लेना पड़ा । उनका यह रूप महिषासुर मर्दिनी कहलाता है । सभी देवताओं के शरीर के दिव्य तेज से ही मां भगवती उत्पन्न हुईं । हिमवान ने उन्हें सवारी सिंह दिया और सभी देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र दिए । मां भगवती ने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा । इसके बाद पूरे नौ दिनों तक के मां भगवती और महिषासुर के बीच महायुद्ध हुआ । महिषासुर के सभी दानव सैनिकों के अस्त्र-शस्त्र देवी भगवती के सामने निरस्त हो गए । अंत समय में महिषासुर को अपनी मृत्यु का अहसास हो गया उसने देवी से प्रार्थना की कि हे देवी आप के हाथों ही मेरा वध हो जिससे कि मुझे मुक्ति प्राप्त हो । इसलिए मैं आपके शरणागत हूं मां । मां भगवती का हृदय करुणामयी और दया भाव वाला है इसलिए मां ने महिषासुर पर करुणादृष्टि दिखाई और उसे वरदान दिया कि मेरे हाथों मृत्यु को प्राप्त कर तुम्हें मेरा सानिध्य भी प्राप्त हो जाएगा और मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा होगी । यही कारण है कि नवरात्रि में मां दुर्गा की सभी प्रतिमाओं में मां भगवती को महिषासुर का वध करते हुए दर्शाया जाता है और पूजा की जाती है ।

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