रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन क्षेत्रवासियों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है जहां अवैध रेत उत्खनन के लिए पेड़ पौधों की बेरहमी से पिटाई कर दी जा रही है वहीं अब क्षेत्र के करोड़ों रुपए लागत से बने प्रधानमंत्री सड़क,मुख्यमंत्री सड़क,लोक निर्माण विभाग की सड़क एवं ग्रामीण सड़क के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है यहां तक कि केंद्र सरकार की एलडब्ल्यूई योजना अंतर्गत लोक निर्माण विभाग के द्वारा 48 करोड़ लागत से लुर्गी रामचंद्रपुर सनावल मार्ग का निर्माण कराया गया था परंतु जो सड़क कुछ माह पूर्व तक चकाचक थी अब इस सड़क में जगह-जगह गड्ढे हो ना शुरू हो गए हैं यहां तक की यही स्थिति रही तो सड़क 6 माह के अंदर अत्यंत जर्जर हो जाएगा एवं फिर से 20 वर्ष पहले जैसी सड़क की स्थिति निर्मित हो जाएगी समय रहते अभी भी प्रशासन संज्ञान लेकर सड़क को बचा सकता है।

       गौरतलब है कि रामचंद्रपुर विकासखंड के विभिन्न ग्राम पंचायतों व दुरस्त ग्राम पंचायत सनावल सहित अन्य गांव  जोड़ने के लिए विगत दो दशक में करोड़ों रुपए लागत से विभिन्न योजना के अंतर्गत सड़क का निर्माण हुआ है एक समय जहां क्षेत्र में नक्सली हिंसा होते रहती थी वहीं सड़कों के जाल न एवं शहर से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण नक्सलियों को नेटवर्क को ध्वस्त करने में पुलिस एवं प्रशासन सफल हुई परंतु एक बार फिर क्षेत्र के सड़कों पर खतरा अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन के कारण मंडराने लगा है। लगातार क्षेत्र की सड़कें जर्जर होते जा रही हैं वही अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन को रोकने के लिए प्रशासन मात्र रस्म अदायगी में लगा है। यदि जिस प्रकार से क्षेत्र के करीब करीब सभी नदियों से अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन जोरों पर है यदि इसी प्रकार की स्थिति रही तो क्षेत्र के सड़कों की स्थिति अत्यंत जर्जर हो जाएगी एवं क्षेत्र फिर सड़कों के मामले में 20 वर्ष पहले चला जाएगा।

ओवरलोड चलती हैं ग्रामीण सड़कों में वाहने…… प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत बनी सड़कें एवं मुख्यमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत बनी सड़क के साथ ही साथ लोक निर्माण विभाग के द्वारा बनी सड़कों पर वाहनों की चलने के लिए क्षमता निर्धारित है परंतु इन सड़क की क्षमता से कई गुना वजन की वाहने रेत लोड करके ओवरलोड चल रही है जिस कारण रोड तो खराब होंगे ही।

पेड़ों की अंधाधुंध हो रही है कटाई……. एक ओर जहां अवैध रेत एवं उत्खनन के लिए पहले अनाधिकृत रूप से साइड का चयन रेत माफियाओं के द्वारा कर लिया जा रहा है वही रास्ता बनाने के लिए सैकड़ों की संख्या में पेड़ों की कटाई कर दी जा रही है स्थिति ऐसी है कि जहां-जहां नया बालू का साइड शुरू हो रहा है वहां वहां तो अगल-बगल पेड़ों का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया जा रहा है ऐसे में क्षेत्र के पर्यावरण के साथ भी किस प्रकार से खिलवाड़ किया जा रहा है समझा जा सकता।

ग्रामीण है चिंतित…….. जिस प्रकार से लगातार गांव की सड़कों की स्थिति अत्यंत जर्जर होते जा रही है इसे लेकर ग्रामीण चिंतित है ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने में दशको को लगे अब फिर से जब सड़क खराब होगी तो कब बनेगा इसका भगवान ही मालिक है। क्षेत्र में हो रही नक्सली हिंसा को देखते हुए तत्कालिक मनमोहन सिंह सरकार बेहतर कनेक्टिविटी के लिए l&w योजना अंतर्गत सड़कों के लिए राशि स्वीकृत की थी।

नदियों के अस्तित्व पर भी लग रहा प्रश्न चिन्ह….. सनावल क्षेत्र में जिस प्रकार से पांगन नदी में रेत का अवैध उत्खनन विगत कुछ वर्षों पहले चरम पर था वही एक बार फिर से क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन हो रहा है अवैध रेत उत्खनन कारण पांगन नदी में कई स्थानों पर तो नदी में बालू ही खत्म हो गया है नदी में अब पेड़ पौधे जमने लगे हैं वही स्थिति अन्य जगहों पर में निर्मित न हो जाए इसका खतरा मंडराने लगा है नदियों के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह अवैध रेत उत्खनन खड़ा कर रहा है।

अब तो आवाज भी नहीं उठा रहे हैं ग्रामीण हो गए हैं बेबस लाचार……… एक और नदी का सीना छलनी कर अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन क्षेत्र में जोरों पर है वही पहले ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया वहीं जब देखा कि विरोध के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई अब तो ग्रामीण भी बेबस एवं लाचार हो गए हैं एवं बस बैठकर गांव के तबाही का मंजर देख कर दुखी हो रहे हैं।

सड़क से लेकर संसद तक उठ चुकी है अवैध रेत उत्खनन की आवाज…….. अवैध रेत उत्खनन को लेकर क्षेत्र में कई बार ग्रामीणों ने आवाज उठाई यहां तक कि आंदोलन भी किए सनावल क्षेत्र में तो कई दिनों तक आंदोलन चलता रहा था वही राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने तो राज्यसभा में भी मामला उठाया था परंतु अब तो ऐसी हो गई है कि कहीं कोई कार्यवाही नहीं होने से गांव गांव से विरोध स्वरूप उठने वाली आवाज भी अब मद्धिम होने लगी है।

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